मामा-जीजा की आवाज निकाल साइबर ठग लगा रहे चूना

एक सप्ताह के अंदर राजधानी के अंदर आये दो मामले

मामा-जीजा की आवाज निकाल साइबर ठग लगा रहे चूना

  • साइबर ठगों के नित नये-नये प्रयोग से लोग परेशान
  • ठगी का शिकार होने के बाद लोगों को थानों से भी नहीं मिल पा रहा न्याय
शिशिर पटेल
लखनऊ। साइबर ठगी के नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। स्कैमर्स लोगों को ठगने के अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। इन दिनों साइबर ठगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआइ को ठगी का अपना नया हथियार बना लिया है। इसलिए मामा, जीजा, साला, भाई की आवाज निकालकर साइबर ठग लोगों को चूना लगा रहे हैं। बीते एक सप्ताह के अंदर लखनऊ में ऐसे दो मामले आ चुके है। जिसमें मामा-जीजा की आवाज निकालकर हजारों रुपये ठग लिये। दोनों मामलों की पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार होने के साथ ही साइबर जालसाजों ने लोगों को ठगने का नया तरीका अपनाया है। अब तक सोशल मीडिया, फेसबुक, इंट्राग्राम व मोबाइल पर ओटीपी समेत अन्य तरीकों से ठगी हो रही थी, लेकिन अब जालसाज एआइ की वॉयस क्लोनिंग टूल की मदद ले रहे हैं। यह टूल आपकी आवाज इतने सलीके से नकल करता है कि अपनी व टूल की आवाज में अंतर नहीं कर पाएंगे। इसके लिए साइबर क्रिमिनल सबसे पहले किसी शख्स को ठगी के लिए चुनते हैं। इसके बाद उसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल को देखते हैं और उसकी किसी ऑडियो व वीडियो को अपने पास रख लेते हैं। इसके बाद एआई की वॉयस क्लोनिंग टूल की मदद से उसकी आवाज क्लोन करते हैं।
 
फिर उनके परिचित को उसकी आवाज में फोन कर बताया जाता है कि उनका हादसा हो गया है या कोई भी इमरजेंसी स्थिति बताकर ठगी की जा रही है। लखनऊ के गोमतीनगर और हुसैनगंज थाना क्षेत्र में इस तरह से दो लोगों के साथ हजारों रुपये की ठगी हो चुकी है। इन पीड़ितों की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दिया है। यह दो मामले एक उदाहरण के रूप में। बाकी प्रदेश भर में न जाने कितने लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे है। ठगी का शिकार होने के बाद थाने व साइबर क्राइम सेल जाने पर सभी को न्याय नहीं मिल पा रहा है। बस चंद लोगों का पैसा वापस हो रहा है। पुलिस की इसी लापवाही के चलते साइबर ठगों के हौंसले दिनों दिन बुलंद होते जा रहे है।

साइबर ठगी से बचने के लिए यह बर्ते सावधानी

प्रभारी निरीक्षक गोमतीनगर दीपक कुमार पांडेय ने बताया कि आवाज बदलकर बात करना वैसे तो एक कला है, जिसमें कुछ लोगों को महारत हासिल होती है। मौजूदा समय में कई लोग अक तकनीक का यूज करके दूसरों की आवाज को कॉपी कर  इसके बाद वे इन आवाज का इस्तेमाल लोगों को ठगने के लिए करते हैं। आइए जानते हैं हाल ही में ऐसे ठगी के केस के बारे में और इससे बचाव के लिए क्या करें। रिश्तेदार की आवाज में कोई फोन आने पर अगर कोई इमरजेंसी बताएं तो इस दौरान आप दूसरे रिश्तेदारों की बात को लेकर घुमाये। ऐसे रिश्तेदार के बारे में जल्दबाजी में जवाब नहीं दे पाएंगा और आप जान जाएंगे। यदि दोस्त या सगे-संबंधी को पैसे ट्रांसफर करने हैं तो एक बार खुद फोन करके कंफर्म कर लें कि सच में फोन करने वाले वही थे। यदि फोन करने तक अपराधी के खाते में रकम ट्रांसफर नहीं हुई तो हो सकता है कि आप ठगी का शिकार होने से बच जाएं। अलग-अलग अकाउंट का अलग-अलग पासवर्ड रखें, एक-जैसे पासवर्ड बनाने से बचें। इससे आप फ्रॉड के शिकार होने से बच जाएंगे।

केस-वन
 
गोविंद सिंह मार्ग निवासी फूलचंद्र दिवाकर ने हुसैनगंज को तहरीर दी। जिसमें बताया कि उनके बहनोई दिल्ली में न्यायाधीश हैं। उनके मोबाइल पर एक फोन आया उसने उसके बहनोई की आवाज निकालकर कहा कि लखनऊ में उनके मित्र का हादसा हो गया है। कुछ रुपये ट्रांसफसर कर दीजिए। इसके बाद खाते से एक लाख 58 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिये लेकिन बाद में जब बहनोई से इस बारे में बात की तो पता चला कि उन्होंने कोई काल नहीं किया है।

केस-टू
 
गोमतीनगर के विनीत खंड के रहने वाले कार्तिकेय ने गोमतीनगर थाने को तहरीर दी। जिसमें उनके द्वारा बताया कि उनकी मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फोन आया। आवाज स्पष्ठ न आने पर पूछा तो बताया कि आपका मामा बोल रहा हूॅ। बोलने वाले की आवाज उसकी मामा की आवाज से बिलकुल मिल रहा था। इसलिए कुछ समझ नहीं आया और इमरजेंसी बताकर उससे नब्बे हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिया। बाद में जब मामा से बात किया तो पता चला कि वे थे ही नहीं। पुलिस ने तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।  
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