बागवानों की टूटी कमर,औने पौने दामों में बिक रहा आम

कम फसल होने के बावजूद भी मंड़ी में नहीं मिल रहे दाम

बागवानों की टूटी कमर,औने पौने दामों में बिक रहा आम

  • आम के ऐसे ही रहे रेट तो होगा बागवानों को काफी नुकसान
  • मंड़ी में आम की अधिकता से नहीं बिक पा रहा आम

मलिहाबाद, लखनऊ। फलों के राजा आम की दुर्दशा मंडियों में खूब हो रही है। मलिहाबाद की दशहरी दिल्ली की मंड़ी में 250-350 रुपये गत्ते के हिसाब से बिक रही है। जबकि एक गत्ते पर बागवानों को करीब 120 रुपये खर्च आ रहा है। फसल कम और ऊपर से मंडियों में आम का उचित दाम न मिलने से बागवानों की कमर टूट गयी है। बागवानों ने अपने सिर पर हाँथ रख ईश्वर को याद कर बागों में टूट बंद करा दी है।

मलिहाबाद की दशहरी देश ही नहीं विदेशों में भी खूब प्रसिद्ध है। इसके स्वाद के लिये शौकीन लालायितत रहते है। 20 मई को रामेश्वरी फ्रूट कंपनी से 4 डीसीएमों से करीब 3200 गत्ते दशहरी आम दिल्ली मंड़ी के लिये रवाना हुआ था। जिसकी बिक्री दूसरे दिन 21 मई को हुई थी। दिल्ली मंड़ी में यह आम 650-800 रुपये प्रति गत्ते के हिसाब से बिका था। जिसके बाद बागवान काफी खुश थे। लेकिन यह बागवानों की खुशी महज एक ही दिन उनके चेहरे पर देखने को मिली। उसके बाद से लगातार दिल्ली मंड़ी में आम के दामों में गिरावट आती गयी।

आलम यह है कि गुरुवार को दशहरी आम 250-350 प्रति गत्ते के हिसाब से बिका साथ ही पुरा आम बिक भी नहीं पा रहा है। जिससे बागवान काफी चिन्तित है। आम बागवान सुनील कुमार व सगीर ने बताया कि उन्होंने पूर्व में ही बाग खरीद लिये थे। वर्तमान की आम फसल महज 35 प्रतिशत ही थी। जो आम बचा है वह बाग में ही 250 रुपये प्रति गत्ता पड रहा है। जबकि इसकी पैकजिंग सहित तुड़ाई आदि पर दिल्ली भेजने में करीब 120 रुपये खर्चा आ रहा है। इस हिसाब से आम उनका 370 प्रति गत्ता मंड़ी पहुंचाई तक पड रहा है। गुरुवार को हुई बिक्री तो उनके खरीद रेट से भी काफी कम हुई है। जिससे बागवान काफी चिन्तित है। आम कारोबारी शमीम, निर्मल ने बताया कि पहले दिन मंड़ी में खुले दाम देख बागवानों ने अधिक आम की टूट कर दी।

जिससे दिल्ली मंड़ी में आम की अधिकता हो गयी साथ ही आम की अपेक्षा व्यापारी कम है। जिससे आम के दामों में काफी गिरावट आयी है। बागवानों ने बताया की अधिकता के चलते व्यापारी मनमाने दामों में आम खरीद कर रहे है। ज्यादा आम पहुंचने से पुरा आम अभी बिक भी नहीं पा रहा है।

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