विश्व एड्स दिवस पर शिविर लगाकर बताये एचआईवी संक्रमण से बचाव के उपाय:आयुर्वेदिक औषधियों से बढ़ेगी इम्युनिटी

विश्व एड्स दिवस पर शिविर लगाकर बताये एचआईवी संक्रमण से बचाव के उपाय:आयुर्वेदिक औषधियों से बढ़ेगी इम्युनिटी

प्रतापगढ़। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा जयराम यादव के निर्देशन में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय छितपालगढ़ द्वारा  स्वास्थ्य शिविर का आयोजन छितपालगढ़ में किया गया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा अवनीश पाण्डेय द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं दी गयी। इसके साथ ही लोगों को इम्युनिटी बढ़ाने के साथ एड्स एवं एचआईवी संक्रमण से बचाव के तरीके बताये। डा अवनीश ने बताया कि एचआईवी और एड्स व्यक्ति के इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है जिससे शरीर में कई संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में छोटी सी चोट या बीमारी भी व्यक्ति को बहुत परेशान करती है।

एचआईवी मरीजों में घाव भरने और बीमारी को ठीक होने में भी काफी समय लगता है. ऐसे में कुछ आयुर्वेदिक तरीके अपनाकर एचआईवी मरीज अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं जिससे उन्हें इस बीमारी से लड़ने में मदद मिलेगी।एड्स एक लाइलाज और जानलेवा बीमारी है. चार दशक बीत जाने के बाद भी अब तक इस बीमारी का इलाज नहीं मिल सका है। एड्स ह्यूमन इम्युनोडिफेशिएंसी वायरस (HIV) की वजह से होता है।ये ऐसा वायरस है जिसका समय पर इलाज ना होने पर आगे चलकर AIDS का रूप ले लेता है.

इसका कोई ठोस इलाज नहीं है लेकिन शुरुआत में अगर HIV का पता लगा लिया जाए तो उसे एड्स में परिवर्तित होने से रोका जाता सकता है।समय पर और बेहतर इलाज मिलने पर एचआईवी पीड़ित भी बाकी लोगों की तरह ही खुशहाल जिंदगी जी सकता है. आयुर्वेद में ऐसे कई इलाज हैं जिनकी मदद से एचआईवी पीड़ित मरीज अपनी इम्युनिटी को मजबूत कर सकते हैं और इस बीमारी से लड़ सकते हैं।नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के मुताबिक, एचआईवी से संक्रमित लोग फ्लू जैसी बीमारी का अनुभव करते हैं

जो संक्रमण के दो से छह हफ्ते के अंदर दिखने शुरू हो जाते हैं। एचआईवी के कुछ लक्षणों में बुखार, गले में खराश, शरीर पर लाल चकत्ते, थकान, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं।एड्स नाम से ही स्पष्ट है कि यह इम्युनिटी अर्थात व्याधिक्षमत्व कम होने से होने वाली बीमारी है। आयुर्वेद के सभी ग्रंथों में इसका उल्लेख व्याधिक्षमत्व और ओज व्यापत के अंतर्गत किया गया है।  लेकिन पूर्ण ओज का क्षय हो जाने पर मृत्यु तक हो जाती है, यही एड्स की अंतिम अवस्था है। आयुर्वेद में इस बीमारी के इलाज़ के लिए ओजवर्धक दवाइयों का प्रयोग होता है। यें दवाइयां रोगी की आयु और रोग के चरण पर निर्भर करती है। 

इस रोग में कुशल वैद्य की देख रेख में अमृता सत्व, आमलकी चूर्ण,शतावरी मूल चूर्ण, कपिकछू  चूर्ण, रुदन्ति चूर्ण आदि से लाभ मिलता है। 
इसके अलावा स्वर्ण वसंतमालती रस, सिद्ध मकरध्वज, रसराज रस,वज्र भस्म, स्वर्ण भस्म, रौप्य भस्म और यसद भस्म आदि का उपयोग चिकित्सक के परामर्श से एड्स के रोगी के लिए लाभप्रद होता है। इनसे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर रोगों से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है।इसके साथ उचित खानपान, स्वस्थ जीवनशैली एवं योग प्राणायाम भी आवश्यक है।

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