सोन नदी में ई.सी एरिया से बाहर अवैध खनन लेकिन कार्रवाई नहीं

ई.सी देकर सीआ ने नहीं लीं कोई सुध, सोन नदी हो गयी पुरी तरह से बर्बाद

जिला टास्क फोर्स के चेयरमैन है डीएम, कभी सोन नदी का नहीं किया निरीक्षण

खनन विभाग खूब खा रहे मलाई ,जल संसाधन विभाग को चटनी पर करना पड़ा संतोष 
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अवैध बालू खनन


रवीश कुमार मणि 
 
पटना ( अ सं ) । कहने के लिए बिहार में जनता की सरकार है लेकिन हकीकत में बिहार में बालू माफियाओं की बहार है और इनकी समांतर सरकार है। पुरा सिस्टम इनके लिए काम करता है। सरकार में जो भी आते है बालू माफिया से साथ घुल जाते है, रंग ऐसा चढ़ जाता है की कानून फिका पड़ जाता । तभी तो आदर्श आचार संहिता में बालू माफियाओं की बल्ले-बल्ले है। अरवल, औरंगाबाद, रोहतास ,पटना आदी जिले में पड़ने वाले सोन नदी में ई.सी एरिया से बाहर बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है और भंडारण के नाम पर बालू का पहाड़ बना दिया गया है और सोन नदी को गहरा कर समुद्र । ई, सी जारी करने वाली बिहार की सीआ को भनक तक नहीं है ? जिले के डीएम साहब भी शायद बेखबर है ? या यूं कहें हरे -हरे नोटों ने सभी के हाथों को बांध रखा है। 
 
सोन नदी पुरी तरह से बर्बाद ,सीआ ने नहीं लीं कोई सुध
 
एक समय में सोन नदी किसानों के वरदान था । या कहें तो पटना भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास के किसानों का जीवन सोन नदी पर ही टिका था। जैसे -जैसे सोन नदी से बालू खनन का दायरा बढ़ता गया ,किसानों की खेती सिमटते चली गयी । किसान बदहाल हो गये तो वहीं बालू माफिया मालोमाल। कभी सोन नदी में खीरा, ककरी, तरबूज, लालमी, लौकी, परवल एवं अन्य सब्जियां लहलाती थी वहीं आज बड़े -बड़े सैकड़ों पॉकलेन मशीन की दहाड़ सुनाई देती है, दिन-रात बालू का खनन हो रहा है। खुलेआम अवैध खनन से जल जीव पर तो नुकसान हो ही रहा है पानी का लेयर इतना नीचे चल गया है की सोन तटवर्तीय सैकड़ों गांवों में पीने के पानी का संकट हो गया है। आम जनता त्रासदी झेलने को विवश है। सोन तटवर्तीय इलाके में पर्यावरण और प्रकृति दोनों नष्ट हो गये है, इससे  सांसद ,विधायक को क्या फर्क पड़ता है।  विपक्ष में थे तो उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और सम्राट चौधरी जी के जुबान पर बालू माफिया होते थे आज क्या हो गया की कार्रवाई की हिम्मत नहीं है ? 
       सूबे में बालू खनन करने का प्रमाण पत्र ( ई .सी ) देने वाली संस्था सीआ है। सीआ द्वारा दिये गये निर्देशिका व शर्तों पर बंदोबस्तधारियों को निर्धारित ई.सी एरिया में बालू खनन करना है, वह भी तीन मीटर से ज्यादा नहीं अगर नमी दो मीटर में ही मिल गई तो इससे अधिक गहराई में खनन करने पर प्रतिबंध है। लेकिन सोन नदी में ई.सी एरिया से बाहर बड़े पैमाने पर अवैध खनन तो हो ही रहा है 60 - 65 प्रतिशत  सोन नदी के बहती धारा में से अवैध बालू खनन दिन -रात किया जा रहा है, जबकि रात में नदी के तल में मशीने सहित मजदूरों के प्रवेश पर प्रतिबंध है । सवाल उठता है देखने कौन जाता है । सीआ, बंदोवस्तधारियों को ई.सी दे मदहोशी के नशे में सो गयी है ,नतीजा बालू के अवैध खनन से सोन नदी पुरी तरह ही नहीं बल्कि बुरी तरह बर्बाद हो गयी है, यह कहना गलत नहीं होगा की अब सोन नदी के अस्तित्व पर खतरा आ गया है। इससे सीआ को क्या फर्क पड़ता हैं ,सरकार से वेतन मिल रही है ही बालू माफिया से भी....
 
डीएम ने कभी और क्यों नहीं किया निरीक्षण  
 
बालू खनन का टेंडर जिले के डीएम द्वारा किया गया है , बंदोवस्तधारियों को वर्क ऑर्डर डीएम के हस्तख्त से मिला है। बिहार खनन नियमावली 2019 के अनुसार जिले के डीएम टास्क फोर्स के चेयरमैन है ,पुलिस अधीक्षक प्रमुख सदस्य । इसी तरह अनुमंडल में एसडीओ व डीएसपी टास्क फोर्स के मेंबर है। सोन नदी क्षेत्र के प्रत्येक जिले में अवैध खनन से जुड़े शिकायतों का अंबार है और अवैध बालू खनन के  वीडियो सीधे तौर पर डीएम और जिला खनन पदाधिकारी के मोबाइल पर भेजा जाता है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती । संबंधित जिले के जिला खनन पदाधिकारी एक तो मोबाइल नही उठाते है और सीधे डीएम साहब पर फेंक देते है की जो निर्णय लेंगे डीएम साहब लेंगे । जिला खनन पदाधिकारी के उदासीनता से स्पष्ट है की मामला गड़बड़ है लेकिन सवाल उठता है संबंधित जिले के डीएम साहब ने क्यों और कभी सोन नदी का निरीक्षण नहीं किया ?.... 
 
खनन विभाग खा रहा मलाई ,जल संसाधन विभाग को चटनी...
 
सोन नदी में अवैध बालू खनन की खबर सभी को है अगर कोई अनजान है तो खनन विभाग एवं जल संसाधन विभाग ।  अवैध बालू खनन करने देने के एवज में खनन विभाग जमकर मलाई खा रहा है। बालू माफिया लाख- दो लाख देते है और महिने में 50 लाख की कमाई अवैध खनन से कर लेते है। जल संसाधन विभाग का इंट्री इस बार हो गया है लेकिन जैसी चाहिए वैसी भौकाल नहीं बना सकें ,नतीजा चटनी पर ही संतोष करना पड़ रहा है। अवैध बालू खनन ,नदी में बांध ,नदी में जगह -जगह गहरे गड्डे के सारे सबूत रहने के बावजूद जल संसाधन विभाग के (सोन बाढ़ सुरक्षा ) ने अभी तक एफआईआर नहीं किया है। जब हमाम में सब नंगे तो फिर किसे बदचलन कहां जाएं ....यह कहना गलत नहीं होगा की बिहार में बालू माफियाओं की जय है ,इनके आगे सभी पराजय ...
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