चुनावी रण में जातीय तिलस्म को तोड़ता मेनका का पांच साल का कार्य

लोकसभा में जातीय संकीर्णता को तोड़ मेनका गांधी ने अपनी सर्वसुलभता से बनाई बढ़त

चुनावी रण में जातीय तिलस्म को तोड़ता मेनका का पांच साल का कार्य

क्या सांसद मेनका गांधी सुल्तानपुर में कराए गए कार्य और विकास से जातीय तिलस्म को तोड़कर नौवीं बार चुनाव जीतकर इतिहास रचने जा रही हैं?

क्या बसपा के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी अवनीश सिंह और सपा के चर्चित नेता सुनील का भाजपा ज्वाइन करना मेनका गांधी की जीत का शुभ संकेत है?

 

रिपोर्ट.......डॉ अजय कुमार सिंह (जिलासंवाददाता)

 

सुल्तानपुर। मई माह की भीषण गर्मी की तपिश के साथ लोकसभा चुनाव की सरगर्मी भी अपने चरम पर आ गई है। जहां पर कोई प्रत्याशी चुनावी कैंपेन में जी जान से लगा है तो कोई पार्टी की अंतर्कलह को की शांत करने में व्यस्त है तो कोई पार्टी के मूल वोट की तकिया लगाकर सुतुरमुर्गी नींद में सो रहा है। इसके बाद सभी प्रत्याशी अपनी अपनी जीत के हवा हवाई दावे कर रहे हैं। 
              आठ बार की सांसद मेनका गांधी अपने चुनाव प्रचार के चालीसवें दिन लगभग 651 गांवों में पहुंच कर जनता से अपने 5 साल में किए गए कार्यों को बता रही हैं। मेनका गांधी प्रतिदिन की तरह आज भी चुनावी दौरे पर निकलने से पहले सुबह 8 बजे लगभग डेढ़ से दो सौ पीड़ित लोगों की समस्या का समाधान कर रही हैं। श्री गांधी द्वारा आज तक सुल्तानपुर लोकसभा के लगभग 80000 पीड़ितों की जमीन, स्वास्थ्य, बिजली, राशन कार्ड, विधवा वृद्धा पेंशन, ऋण आदि से जुड़ी समस्याओं का सकारात्मक निस्तारण कराया गया है। आज जिसका लाभ मेनका गांधी को लोकसभा चुनाव में सीधा-सीधा जनसमर्थन के रूप में मिल रहा है। श्रीमती गांधी की नुक्कड़ सभा में सभी जाति धर्म के महिला–पुरुष की उमड़ रही भीड़ से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मेनका गांधी लोकसभा चुनाव में अपनी काफी बढ़त बना चुकी हैं। सभी समाज के सभी लोग जाति, धर्म से आगे बढ़कर मेनका गांधी के साथ खड़े हो रहे हैं। 
              लोकसभा के चुनाव में मेनका गांधी को आगे बनाए रखने का कार्य सरकार की निशुल्क योजना का लाभ पा रहे जरूरतमंद लोग कर रहे हैं जिन्हें बिना भेदभाव के सरकार राशन और आवास, बृद्ध विधवा पेंशन आदि दे कर उनके जीवन को सरल बना रही है। सरकार की ये निशुल्क योजनाएं विधान सभा 2022 के चुनाव की तरह ही इंडी गठबंधन (सपा) के चुनावी गणित को तोड़मरोड़ कर रख देने की संभावना है।
            अमूमन देखा जाए तो ओबीसी वर्ग की भर, लोहार, सोनार, राजभर, पाल, मौर्य, माली, बिन्द, कहार,कसौधन, चौरासिया, गिरी, हलवाई, प्रजापति, गडेरिया, केवट, नाई, भूंज, विश्वकर्मा, साहू आदि कम जनसंख्या वाली जातियों को भाजपा के अलावा कोई चुनाव में भी पूछने वाला दिखाई नहीं दे रहा है। वर्तमान चुनाव में इन जातियों का अब पूरा झुकाव मेनका गांधी की तरफ गया है। तो ओबीसी की बड़ी जाति में संजय निषाद के आह्वान पर लगभग 70 प्रतिशत निषादों का झुकाव मेनका गांधी के तरफ हो रहा है। तो दूसरी तरफ पटेल/वर्मा जाति अपने स्वीकार्य नेत्री अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व, जिला अध्यक्ष डॉ आर ए वर्मा और लंभुआ विधायक की चुनावी सक्रियता से मेनका गांधी को पूरा मजबूत कर रहे हैं। मेनका गांधी के विकास और विश्वास के आगे सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला भी फेल हो रहा है।
             बहुजन समाजवादी पार्टी से लंभुआ विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी अवनीश सिंह और सपा के नेता सुनील अपनी अपनी मूल पार्टी छोड़कर भाजपा को ज्वाइन कर रहें हैं। किसी नेता का चुनाव के मध्य अपनी पार्टी छोड़ कर जाना चुनाव की स्थिति स्वतः बयां कर रहा है कि लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी अपने प्रतिद्वंदी से बहुत आगे निकल रही हैं। तो दूसरी तरफ अन्य पार्टी के प्रत्याशी पार्टी की टूट को जोड़ने में लगे हैं।
          सुल्तानपुर की सबसे हॉट सीट इसौली विधानसभा से 2019 के लोकसभा चुनाव में चंद्रभद्र सिंह सोनू सपा बसपा गठबंधन के सबसे मजबूत प्रत्याशी थे। जिसके बाद इन्हें 84933 मत प्राप्त हुआ तो वही इस विधान सभा में मेनका गांधी को 79382 मत प्राप्त हुआ था। आज भद्र परिवार इस लोकसभा चुनाव में सियासी तौर पर खामोश है, जिसका सीधा फायदा मेनका गांधी को मिल रहा है। एक तरह से इसौली विधान सभा में मेनका गांधी की अच्छी बढ़त बनती दिखाई दे रही है।
                एक तरफ भाजपा का सशक्त मजबूत नेतृत्व और संगठन शक्ति और दूसरी तरफ मेनका गांधी का निस्वार्थ सेवाभाव और आठ बार के लोकसभा चुनाव का अनुभव मेनका गांधी को मजबूत करता जा रहा है। 
         लोगों का कहना है कि मेनका गांधी का व्यक्तित्व सच में एक मां जैसा है। जिस प्रकार एक मां को अपने बच्चे की चिंता सदैव रहती है उसी तरह मेनका गांधी को पूरे लोकसभा के लोगों की चिंता लगी रहती है। हम सब जाति पर नहीं विकास पर मतदान करेंगे।ऐसी स्थिति में क्या सांसद मेनका गांधी सुल्तानपुर में कराए गए कार्य और विकास से जातीय तिलस्म को तोड़ते हुए नौवीं बार चुनाव जीतकर इतिहास रचने जा रही हैं?
 
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