पशुओं के चारे की समस्या का निदान करना बड़ी चुनौती : डॉ दत्त

पशुओं के चारे के लिए भूमि की कमी से पशुउत्पादकता में देखने को मिल रहा प्रभाव

पशुओं के चारे की समस्या का निदान करना बड़ी चुनौती : डॉ दत्त

बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के पशु पोषण विभाग में ”पशुधन उत्पादन, स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ाने के लिए नवीन फीड संसाधन विषय पर 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न भागों, महाराष्ट्र, उड़ीसा, तमिलनाडु, आन्ध प्रदेश, केरल, मध्य प्र्रदेश, पंजाब तथा उत्तर प्रदेश के 22 वैज्ञानिक एवं प्राध्यापक भाग ले रहे हैं।उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि तथा संस्थान निदेशक डा. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि संस्थान के वर्तमान समय में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम की बहुत उपयोगिता है। पशुओं के चारे हेतु भूमि कम होती जा रही है जिससे पशुउत्पादकता तथा प्रजनन में प्रभाव देखेने को मिला है। आज हमारे सामने चुनौती है कि किस प्रकार हम पशुओं के चारे की समस्या का निदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस विभाग ने पशुओं के लिए पोषण सम्बन्धी उल्लेखनीय कार्य किया है तथा इस विभाग को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा उच्च संकाय प्रशिक्षण केन्द्र (काफ्ट) का दर्जा प्राप्त है।
 
डा. दत्त ने नयी शिक्षा नीति के अनुसार संस्थान को अब अन्य विश्वविद्यालयों तथा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय एजेन्सियों तथा संगठनों से सहयोग व सम्बन्ध बढ़ाने होंगे जिससे संस्थान के संसाधनों तथा ज्ञान के प्रचार प्रसार में वृद्धि की जा सके। संस्थान के संयुक्त निदेशक, शैक्षणिक डा. एस.के. मेंदीरत्ता ने इस अवसर पर कहा पशु पोषण विभाग संस्थान का सबसे पुराना संस्थान है तथा इस संस्थान ने पशु आहार सम्बन्धी अनेकों शोध कर तकनीकियों को विकसित किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि व्याख्यानों में सभी विभागों के छात्रों को शामिल किया जाये जिससे उनके ज्ञान में वृद्धि हो सके। पशु पोषण विभाग के विभागाध्यक्ष तथा निदेशक काफ्ट ने बताया कि इस विभाग का इतिहास 100 साल से भी पुराना है। विभाग पशु पोषण पर अनेकों प्रशिक्षण कार्यक्रम करा चुका है। इस विभाग ने पशुओं के पोषण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
 
पाठ्यक्रम निदेशक डा. एस.के. साहा द्वारा सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विभाग पिछले 100 सालों से पशुधन के क्षेत्र में शोध शिक्षा तथा प्रसार द्वारा अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि प्रशिक्षणार्थियों के लिए इस दौरान 47 व्याख्यान तथा 10 प्रैक्टिकल कराये जायेगें जिसमें चार व्याख्यान बाहर के विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत किये जायेंगे इसके साथ ही प्रशिक्षणार्थियों को संस्थान के मुक्तेश्वर परिसर तथा गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्व विद्यालय पंतनगर का भी भ्रमण कराया जायेगा तथा व्याख्यान दिया जायेगा। कार्यक्रम का संचालन पशु पोषण विभाग की वैज्ञानिक डा. अंजू काला द्वारा किया गया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डा. एस.के. साह द्वारा किया गया। इस अवसर पर पाठ्यक्रम समन्वयक डा. ए.के. वर्मा, डा. असित दास, डा. विश्वबन्धु चतुर्वेदी, डा. नारायण दत, डा. सुनील जाधव, डा. ज्ञानेन्द्र सिंह सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक तथा छात्र उपस्थित रहे।
 
 
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