डा0 मनोज सक्सेना ने अपने पिता जी की प्रथम पुण्यतिथि पर कराया कवि सम्मेलन 

 हरवीर सिंह की पंक्तियां--स्वार्थ भाव तज जनहित में जो जीवन अर्पित करता है, मर कर भी वह मनुज धरा पर, राज दिलों पर करता है

मैनपुरी-जनपद में हिंदी साहित्य के उन्नयन एवं सवर्धन के लिए कवि साहित्यकार डा0 मनोज सक्सेना ने अपने पिता जी की प्रथम पुण्यतिथि पर कवि सम्मेलन आयोजित किया। हिन्दी साहित्य संवर्धन में हर वर्ष पिता स्व० राम प्रकाश सक्सेना की पुण्यतिथि पर साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा। बुधवार को नगर के भीमसेन मंदिर स्थित निधि भवन में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजीव जौहरी पूर्व जीएसटी आफीसर ने की। मुख्य अतिथि जीएसटी आफीसर फिरोजाबाद रहे।  
कवि सम्मान समारोह में सहित्यकार विनोद माहेश्वरी को हिंदी साहित्य सेवा के लिए, "हिंदी साहित्य सवर्धन सम्मान" शॉल, प्रतीक चिह्न एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। हर वर्ष यह सम्मान जनपद के कवि साहित्यकार को दिया जाएगा। संचालन डा० मनोज सक्सेना ने किया। 
 
कवियों ने काव्य पाठ के रूप में कवि शिव सिंह निसंकोच ने कहा- कुछ तो डर भगवान से मत कर औछे काम, पता नहीं हो जाए कब इस जीवन की शाम। डा० मनोज सक्सेना ने कहा- यादों का मेला लगा है द्वार पर, याद आती है तुम्हारी त्योहार पर, पिता के न रहने पर ऐसा लगे, अकेला रह गया पतवार पर। उपेन्द्र भोला ने कहा- कभी संकट नहीं आता अगर आता तो टल जाता, हमारे सिर बुजुर्गों का सदा ही हाथ रहता। हरवीर सिंह सुल्तानगंज ने कहा- स्वार्थ भाव तज जनहित में जो जीवन अर्पित करता है, मर कर भी वह मनुज धरा पर राज दिलों पर करता है। राज किशोर राज ने कहा- उन्हें सम्मान मिलता है जो जीवन को तपाते हैं।
 
उन्हीं को मान मिलता है उसी सब को लुटाते हैं। रमेश चन्द्र चक ने कहा- कर्म कुछ ऐसा करों, बनी बुनीयाद रहे। यश मिश्रा ने कहा- वंदनीय और पूजनीय वही लोग, जो कि जिंदगी में आते दूसरों के काम। सत्येन्द्र पाठक निडर ने कहा- गम और अपमान के गरल को जो पीता है, मेरी नजर में आप वही पिता होता है। पुष्पेन्द्र सिंह पुष्प ने कहा- जिस दिन जन्म हुआ मात-पिता का वह दिन कितना शुभ होगा। इस दौरान संतोष हजेला, ज्ञानेश्वर सक्सेना, ओमप्रकाश वर्मा, उर्मिला पाण्डेय, बिजेंन्द़ सिंह सरल, रूप लाल शाक्य, शिवदत्त दुबे, जय प्रकाश मिश्रा, डा० ए०सी० तिवारी, वरिष्ठ साहि० श्रीकृष्ण मिश्र, अभय शर्मा, आदि उपस्थित थे। डा० मनोज सक्सेना ने सभी श्रोताओं एवं कवियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
 
 
 
 
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