नजीर अकबराबादी, धरती पर साहित्यिक ताजमहल: प्रो. अवस्थी

नजीर अकबराबादी, धरती पर साहित्यिक ताजमहल: प्रो. अवस्थी

लखनऊ। उर्दू विभाग एवं हिन्दुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय सांस्कृतिक चेतना का शायर: नजीर अकबराबादी के व्यक्तित्व संब अवदान पर केन्द्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन एपी सेन हॉल लखनऊ विश्वविद्यालय में किया गया।

जिसकी अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रोफेसर अरविन्द अवस्थी ने की। अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा कि नजीर अकबराबादी आगरा की धरती पर एक साहित्यिक ताजमहल की तरह स्थापित है। जो हिन्दुस्तानी रीति रिवाज का परचम बंलद कर गए।

बीज वक्तव्य पदमश्री प्रो. अख्तरूल वासे ने दिया और बताया कि नजीर अकबराबादी हिन्दू मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है जो भारतीय त्यौहारों रीतियों पर केन्द्रित व आधारित शायरी की प्रो. संगीता साहू व अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं प्रो. राकेश द्विवेदी मुख्य कुलानुशासक तथा वरिष्ठ साहित्यकार रविनन्दन सिंह ने भी अपने विचार रखे।

उर्दू विभाग के कोआर्डिनेटर तथा प्रोग्राम के संयोजक डॉ. फाजिÞल अहसन हाशमी ने अतिथियों का स्वागत शॉल, स्मृति चिन्ह, पुष्प गुच्छ देकर किया। इसके अतिरिक्त तकनीकी सत्र सहित दो अन्य सत्र का आयोजन किया गया जिसमें विद्वानों ने अपने विचार रखे। इन सत्रों में प्रो. सगीर इफराहीमी, प्रो. गो. काजिम, प्रो. खान फारुक प्रो. हुमा खाजा प्रो. शफीक अशरफी, प्रो. सालिहा रशीद, प्रो. अब्बास रजा नय्यर, डॉ. सत्यकेतु, डॉ. शबनम रिजवी, डॉ. जानिसार आलम, डॉ. शबीब अलवी, प्रो. उमर कमालुददीन परीक्षा नियन्त्रक विद्यानन्द त्रिपाठी, प्रो. ओपी शुक्ला इत्यादि ने अपने विचार रखे।

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