मोबाइल को जरूरत बनाओ, आदत नहीं

ऑनलाइन गेमिंग की लत शराब के नशे जैसी घातक

मोबाइल को जरूरत बनाओ, आदत नहीं

लखनऊ। मोबाइल हमारी जरुरत का एक संसाधन है जो हमारी आदत न बने तो ज्यादा बेहतर होगा। माता-पिता आपको पढ़ने के लिए भेजते हैं कि आप पढ़कर लिखकर अपने माता-पिता और देश का नाम रोशन करें। यह बात लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग और हेड डिजिटल वर्क्स के संयुक्त तत्वाधान में संपन्न हुए 'मोबाइल गेमिंग डीएडिक्शन अभियान के अंतर्गत खेलो! मगर ध्यान से कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कही। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग की लत शराब के नशे जैसी घातक है। उन्होंने कहा कि तकनीकि का जाल वरदान भी है और अभिशाप भी।
 
कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा के लिए वरदान बने मोबाइल अब छात्रों के लिए लत बन गए है।  मोबाइल में ऑनलाइन गेम ही समय गुजारने का जरिया तो बना लेकिन मनोरंजन का यह साधन अब बुरी लत में तब्दील हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी मोबाइल गेमिंग की लत को बच्चों से दूर करने की नीतियां बना चुके है और जल्दी ही ऐसी कई नीतियां हमारे सामने होंगी। प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि यदि भारत को पुन: विश्व गुरु बनना है तो आप सभी युवाओं को मोबाइल की लत छोडनी होगी।
 
लखनऊ पश्चिम के एडिशनल पुलिस कमिश्नर एवं साइबर एक्सपर्ट चिरंजीव नाथ सिन्हा ने  कहा कि ऑनलाइन खेलना ही क्यों, जब आपके पास मनोरंजन के लिए किताब, गायन और मैदानी खेल पहले से ही हैं। जिनसे आपका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। यदि खेल ही रहे हैं तो बिना सोचे समझे किसी नोटिफिकेशन का जवाब न दें।
 
साइबर एक्सपर्ट और मनोवैज्ञानिक  प्रोफेसर प्रदीप कुमार खत्री ने बताया कि अगर हम मोबाइल प्रबंधन नहीं करते हैं तो हमें मनो-चिकित्सक के पास जाने से कोई नहीं रोक सकता है। गेमिंग कंपनी हेड डिजिटल वर्क्स के उपाध्यक्ष सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि आज मोबाइल के माध्यम से बहुत सारे प्रलोभन दिए जा रहे है, लेकिन आपको किसी भी लालच में नहीं फंसना है। ऑनलाइन गेमिंग में लोग इनाम के चक्कर में गेम खेलने लगते है फिर उनको इसकी लत लग जाती है। एक बात हमेशा ध्यान रखिये कि यह एक रोग की तरह और यह रोग लालच में बढ़ता चला जाता है।
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