बदायूं में बीते 40 सालों में किसी विजेता को नहीं मिले 50 फीसदी वोट

 बदायूं में बीते 40 सालों में किसी विजेता को नहीं मिले 50 फीसदी वोट

लखनऊ। 18वीं लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में ब्रज और रुहेलखंड की 10 सीटों पर सात मई को मतदान होगा। इसमें एक सीट सूफी-संतों औलियाओं और पीरों की भूमि वाली बदायूं की है। पिछले चार दशकों में इस सीट पर हुए 12 चुनाव में कोई भी विजेता कुल मतदान में 50 फीसदी के जादुई नंबर को छू नहीं पाया। उल्लेखनीय है कि बदायूं से दिल्ली का सफर तय करने वाले दो सांसद ही अब तक चुनावी पिच पर '50' बना सके हैं।

ओंकार सिंह को मिले थे 68.05 फीसदी वोट-
बदायूं संसदीय सीट पर 1977 में हुए आम चुनाव में भारतीय लोकदल प्रत्याशी ओंकार सिंह ने 50 फीसदी से ऊपर वोट हासिल किए थे। इस चुनाव में 3 उम्मीदवार मैदान में थे। कुल 340,263 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। ओंकार सिंह ने 68.05 फीसदी मत पाकर कुर्सी कब्जा जमाया था। कांग्रेस के उम्मीदवार मलिक मोहम्मद मुशीर 24.47 फीसदी मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे। ओंकार सिंह से पहले 50 फीसदी का आंकड़ा 1952 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के बदन सिंह ने छुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को 54.21 फीसदी वोट मिले थे।

1977 के बाद किसी ने नहीं छुआ 50 फीसदी का आंकड़ा-
छठी लोकसभा के लिए 1977 में हुए चुनाव में ओंकार सिंह के बाद बदायूं से किसी भी विजेता ने 50 फीसदी का आंकड़ा नहीं छुआ। 1980 के आम चुनाव में ये सीट कांग्रेस (आई) के मोहम्मद असरार अहमद ने 38.28 फीसदी मत हासिल कर जीती थी। सन् 1984 के चुनाव में कांग्रेस के इकबाल शेरवानी 44.59 फीसदी वोट के साथ विजेता बने। 1989 के आम चुनाव में यहां से जनता दल के प्रत्याशी शरद यादव ने जीत हासिल की। शरद यादव को 47.00 फीसदी वोट मिले।

1991 में पहली बार खिला कमल-
10वीं लोकसभा के लिए 1991 के आम चुनाव में इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार स्वामी चिन्मयानंद ने पहली बार कमल खिलाया। स्वामी चिन्मयानंद को 36.08 फीसदी वोट मिले। जनता दल के शरद यादव 32.61 फीसदी वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे।

सलीम शेरवानी ने पहली बार साइकिल दौड़ाई-
बदायूं सीट पर पहली बार सपा की साइकिल को सलीम शेरवानी ने 1996 के आम चुनाव में दौड़ाया। इस चुनाव में सपा उम्मीदवार को 37.51 फीसदी वोट मिले। बसपा प्रत्याशी बृज लाल 28.95 फीसदी वोट पाकर रनर रहे। सलीम शेरवानी ने 1998, 99 और 2004 के चुनाव में इस सीट पर सपा का कब्जा बरकरार रखा। 1998 में सलीम शेरवानी को 41.83, 1999 में 39.15 और 2004 के चुनाव में 45.03 फीसदी वोट हासिल हुए। सलीम शेरवानी चार बार लगातार जीत के बावजूद 50 फीसदी वोट का जादुई आंकड़ा छूने में नाकाम रहे।

धर्मेन्द्र को मिले थे 48.50 फीसदी वोट-
2009 के आम चुनाव में सपा ने इस सीट से धर्मेन्द्र यादव को उतारा। धर्मेन्द्र सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के भतीजे हैं। धर्मेन्द्र यादव ने 31.70 फीसदी वोट हासिल कर सपा की जीत का सिलसिला कायम रखा। दूसरे स्थान पर रहे बसपा के डीपी यादव के खाते में 27.29 फीसदी वोट आए। 2014 के आम चुनाव में सपा के धर्मेन्द्र यादव ने 48.50 फीसदी मत पाकर कुर्सी कब्जा जमाया था। भाजपा के उम्मीदवार वागीश पाठक 32.31 फीसदी मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।

2019 में 47.28 फीसदी वोट पाकर जीती भाजपा-
पिछले आम चुनाव में भाजपा उम्मीदवार डॉ.संघप्रिया गौतम ने यहां जीत का परचम फहराया। भाजपा प्रत्याशी को 47.28 फीसदी वोट प्राप्त हुए। सपा के धर्मेन्द्र यादव 45.58 फीसदी वोट हासिल कर दूसरे नंबर पर रहे। कांग्रेस के सलीम शेरवानी 4.8 फीसदी वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।

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