उफ् ! इतनी ठंड की हाथ पर हो जाए सुन्न, नहीं जले अलाव

उफ् ! इतनी ठंड की हाथ पर हो जाए सुन्न, नहीं जले अलाव

कोटवाधाम/बाराबंकी। उफ् ! इतनी ठण्ड कि हाथ पैर सुन्न हो जाएं कहीं पर भी क्षेत्र में अलाव आदि जलाए जाने की व्यवस्था अभी तक नहीं दिखाई दे रही है जिससे आम जनमानस पढ़ रही भीषण ठंडक के चलते काफी अस्त व्यस्त होता जा रहा है। पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण ठंडक व कोहरे से जनजीवन काफी अस्त व्यस्त होता जा रहा है परन्तु क्षेत्र में कहीं भी तहसील प्रशासन के द्वारा अलाव आदि जलाए जाने की कवायद नहीं की गई है जिसका आलम यह है कि लोग घरों में दुकबने को विवश हो रहे हैं इसमें सबसे ज्यादा परेशानी राह से गुजरने वाले लोगो को होती है जिनके द्वारा अक्सर यह कहते हुए सुना जाता है की उफ् ! इतनी ठंड कि हाथ पैर सुन्न हो जाएं परन्तु कहीं पर भी अलावा आदि जलते नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। इसी समस्या के दृष्टिगत राजा राम राम राज शिवराज राजेश कुमार धर्मेंद्र कुमार प्रेम कुमार रमेश चन्द्र रूप नरायन मंगल प्रसाद अजीत कुमार परशुराम विनोद कुमार आदि ग्रामीणों ने खजुरी सैदखान पुर कोटवाधाम रानीकटरा मरकामऊ सैदनपुर किंतूर मेला रायगंज बरोलिया अमरा देवी आदि गावो के सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाए जाने की शासन से मांग किया है।
 
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