डोटासरा और राठौड के बीच नहीं रुकी बयानबाजी

डोटासरा और राठौड के बीच नहीं रुकी बयानबाजी

जयपुर। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बीच तीन दिन से जारी तल्ख बयानबाजी का दौर अब तेज हो गया है। राठौड़ और डोटासरा ने आधी रात से लेकर सुबह और दिन में एक्स पर एक-दूसरे पर तीखा हमला बोला। इससे पहले गुरुवार को भी दोनों नेता एक्स पर एक-दूसरे पर पलटवार करते रहे। राठौड़ ने डोटासरा की शैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें अहंकारी बताते हुए लिखा कि अगली बार और जीत गए तो मोदी के बनाए सिक्स लेन हाईवे से आगरा ले जाना पड़ेगा, यानी पागलखाने ले जाना पड़ेगा। उन्होंने डोटासरा पर तंज कसते हुए लिखा कि जरा होश की बात करो, अब यहां नाथी का बाड़ा नहीं। राठौड़ पर पलटवार करते हुए डोटासरा ने लिखा कि कौन कहां जाएगा और कौन कहां आएगा, ये वक्त का पहिया बताएगा। आपके बयानों के ओछेपन की मीनार में आगरा वाला अनुभव खूब झलक रहा है। अपने पे बात आए तो मर्यादा याद आए, औरों पर झूठे लांछन लगाएं तो सारी मर्यादा भूल जाएं। कीचड़ उछाल कर कीचड़ से कौन बचा है, मर्यादित रहना ही मर्यादा का उसूल सच्चा है। माफिया के 'दाग' में कब तक ओढ़ोगे शराफत, फिर कहता हूं, आलोचना और आरोप के फर्क में रखो जरा नजाकर। डोटासरा ने लिखा कि जिन बच्चों ने दिन रात मेहनत कर आपकी सरकार के समय आरएएस परीक्षा पास की, उनकी मेहनत पर खिल्ली उड़ाकर झूठे आरोप तीन साल से लगा रहे हो, सिर्फ झूठा हल्ला मत मचाओ, दोनों जगह सरकार तुम्हारी, दिल खोलकर जांच करवाओ।

गुरुवार रात रात 9:34 बजे राजेंद्र राठौड़ ने डोटासरा पर फिर पलटवार करते हुए लिखा कि हां, मैं मानता हूं लांछनबाजी में मैं क्या, कोई भी आपका मुकाबला कर ही नहीं सकता। इसलिए मुझे इस प्रतियोगिता में आपके साथ कभी भी शामिल नहीं समझें। आपकी यह 'विशेषज्ञता' आपको ही मुबारक। आपको माफिया की याद अब आई? पांच साल में आपकी सरकार को क्या सन्निपात हो गया था? जारोली, कटारा, केसावत, राणावत सबने किया था जो भ्रष्टाचार, तब दागदारों की क्यों नहीं करवाई जांच, आरपीएससी की प्रतिष्ठा पर भी आई थी आंच। युवाओं के कलेजे में फंसी रही थी बेरोजगारी की फांस। मेहनत और प्रतिभा की खिल्ली किसने उड़ाई? राजस्थान का हर प्रतियोगी छात्र जानता है, सब कुछ सामने आएगा, बस धैर्य रखिए। राठौड़ ने लिखा कि जिन बच्चों ने दिन रात मेहनत कर परीक्षा पास की, दुःख तो यही है कि वे तो बेचारे निराशा के घोर अंधेरे में डूब गए। उजाले किनके हिस्से आए और क्यों आए, यह पूरा प्रदेश आज जान रहा है। इसी कथित 'मेहनत' और चार-चार अभ्यर्थियों के एक जैसे नंबर कैसे लाए जाएं, का ही 'फॉर्मूला' तो वे सभी गरीब बेरोजगार पूछ रहे हैं जो पेपर लीक से ठगे गए हैं। और हां, जांच करवाने की यूं चुनौतियां देने से कोई अपराध खत्म नहीं होता। याद रखिए कि ए क्राइम नेवर डाइज, बी यू सो हाई, द लॉ इज अबाव यू।

रात 11:59 बजे डोटासरा ने राठौड़ पर पलटवार करते हुए लिखा कि ये हिट एंड रन पॉलिटिक्स छोड़िए, अब विपक्ष में नहीं सरकार में हो आप। हाथ पर हाथ रखकर क्यों बैठे हो बेरंग, अगर है दम, तो करके दिखाओ आरपीएससी भंग, चाहे मर्जी जो लो एक्शन, पर बंद करो ये झूठा मिशन। किसानों के बच्चों पर ही छाती क्यों पीटते हैं स्वयंभू सीएम! दबाने का दौर बीत चुका है, हमारे बच्चे पढ़ेंगे भी और कामयाब बनेंगे भी। रात 12:22 बजे राजेंद्र राठौड़ ने डोटासरा पर जवाबी हमला बोलते हुए लिखा कि तुम्हारी और मेरी राहें अलग-अलग तो होनी ही हैं क्योंकि तुम जहां को जा रहे हो, मैं वहीं से आ रहा हूं। चार बार की जीत से ही अगर आपने स्वाभिमान और अहंकार के अंतर को भुला दिया, कहीं एक बार और जीत आए तो मोदी के बनाए सिक्स लेन हाईवे से आगरा ले जाना पड़ेगा।

राठौड़ ने डोटासरा के लिए लिखा कि मुझे भी गर्व है कि आपसे दोगुनी बार जीतने के बाद भी विनम्रता अभी जीवंत है क्योंकि यह भाजपा है, छल प्रपंच का अखाड़ा नहीं। जरा होश की बात करो, अब यहां नाथी का बाड़ा नहीं। जो करा है, वो ही सर्टिफिकेट में भरा है, 'मेहनत' से चार-चार अभ्यर्थियों के एक जैसे अंक लाने से पहले सोचना था कि नंबर तो थोड़े कम ज्यादा कर लेते। नहीं सोचा, चूक हुई, इसीलिए सर्टिफिकेट दिया गया है। इसका भी दोष दूसरों पर? बच्चे सभी के पढ़ेंगे और कामयाब भी होंगे, बशर्ते पिछले दरवाजे से पास होने वाले 'फॉर्मूला' बाजों से बच सके, 'बशर्ते' किसी खुदगर्ज के 'कलाम' उनकी राह के रोड़े ना बने। डोटासरा ने शुक्रवार सुबह 10:29 बजे राठौड़ पर फिर जवाबी हमला बोला। लिखा कि कौन कहां जाएगा और कौन कहां आएगा, ये वक्त का पहिया बताएगा। आपके बयानों के ओछेपन की मीनार में आगरा वाला अनुभव खूब झलक रहा है, बात करते हैं विनम्रता की। होती है जिनमें अदब और शिष्टता, वो दिखाते नहीं हीनता और निकृष्टता। राजनीतिक रूप से जिंदा होने की सीढ़ी कोई और ढूंढिए, राम राम।

राठौड़ ने दोपहर 11:39 बजे डोटासरा को जवाब देते हुए लिखा कि तू इधर उधर की न बात कर, बस ये बता कि बेरोजगारों के भरोसे के काफिले क्यों लूटे, जो रहबर थे वे राहजन क्यों बने? हिफाजत ऐसी ना हो कि हफीज गायब हो जाए, दवा ऐसी ना हो कि मरीज ही गायब हो जाए। लोकतंत्र की इस जंग में जीत चाहे हमारी हो या तुम्हारी, पर लफ्ज ऐसे ना हों कि तमीज गायब हो जाए। बहरहाल अब आपकी 'विशेषज्ञता' परवान चढ़ने लगी है। मानसिकता और भाषा की निम्नता साफ दिखने लगी है, यानी सभ्यता के लिए खतरे की घंटी बजने लगी है, जय श्री राम।

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