पीजीआई में शुरू हुई जीन थेरेपी
— पीजीआई ने इलाज के इतिहास में एक बड़ी कामयाबी हासिल की
— जीन मैनिपुलेशन के लिए स्प्लिसिंग मॉडिफायर थेरेपी की शुरुआत
लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान ने नेशनल रेयर डिजीज पॉलिसी के तहत नैटको फार्मा की ओरल स्प्लिसिंग मॉडिफायर दवा जिसे नैटस्मार्ट ब्रांड नाम से जाना जाता है वह हासिल की है। ये जानकारी निदेशक पद्मश्री प्रो. डॉ. राधा कृष्ण धीमन ने दी।

गुरुवार को संस्थान के 'डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल जेनेटिक्स' में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित 15 बच्चों को इस दवा का पहला बैच मुफ्त में दिया गया। अभी 100 से ज़्यादा बच्चे रजिस्टर्ड हैं और 50 से ज़्यादा बच्चे दवा मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं। संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. डॉ. राधा कृष्ण धीमन ने इस शानदार उपलब्धि के लिए 'मेडिकल जेनेटिक्स विभाग' को बधाई दी। डॉ. धीमन ने लोगों को संबोधित किया और बहुत ही भावुक और हौसला बढ़ाने वाला भाषण दिया। उन्होंने दवा बांटी और बच्चों ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। साथ ही मिठाइयों का आदान-प्रदान भी हुआ।
इस मौके पर एसजीपीजीआई के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक. प्रो. देवेंद्र गुप्ता, संयुक्त निदेशक , प्रकाश सिंह और परचेज ऑफिसर गंगा विष्णु भी मौजूद थे। मुश्किल हालात के बावजूद दवा हासिल करने में ऑफिस का खास योगदान रहा। मेडिकल जेनेटिक्स टीम की अगुवाई विभागाध्यक्ष "डॉ. कौशिक मंडल" कर रहे हैं, जिन्होंने भारत में बनी दवा हासिल करने के लिए तमाम मुश्किलों का सामना किया।
यह घटना जेनेटिक बीमारियों के इलाज के इतिहास में एक बड़ी कामयाबी है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान ने दुनिया को दिखाया है कि भारत उन बीमारियों के खिलाफ अपनी लड़ाई खुद लड़ सकता है, जिसका इलाज नामुमकिन माना जाता था। पीजीआई का मेडिकल जेनेटिक्स विभाग देश में अपनी तरह का पहला विभाग है और अब यह कई तरह की जेनेटिक बीमारियों का इलाज कर रहा है।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
