हिन्दी को सर्वोत्तम स्थान मिलेगा: दिनेश शर्मा
लखनऊ। हिन्दी को सर्वोत्तम स्थान मिलेगा किन्तु इसके लिए सबसे अधिक आवश्यकता मानसिक गुलामी को दूर करने की है। यह बात राष्ट्रधर्म कार्यालय में आयोजित विचार गोष्ठी में प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमन्त्री दिनेश शर्मा ने कही। शर्मा ने कहा कि हिन्दी को लेकर विभिन्न स्तरों पर महत्त्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब वे प्रदेश के शिक्षा मंत्री थे तो उन्होंने अपने मंत्रालय में सारा कार्य हिन्दी भाषा में ही करवाया था। उल्लेखनीय है कि यह विचार गोष्ठी- राजभाषा हिन्दी-संवैधानिक और वर्तमान स्थिति- पर आयोजित की गयी थी। शर्मा ने कहा कि राज्यसभा सांसद बनने के बाद उनके प्रयास से 20 विभागों में पत्राचार हिन्दी भाषा में ही किया जा रहा है। जिन्हें हिन्दी नहीं आती है उन्हें सिखाने के लिए प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये गये हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अब आवश्यकता इस बात की है कि इण्टर तक संस्कृत भाषा को अनिवार्य किया जाये।
राष्ट्रधर्म के प्रभारी निदेशक सर्वेश चन्द्र द्विवेदी ने कहा कि संविधान के अनुसार 1965 तक हिन्दी भाषा लागू होनी थी किन्तु तत्कालीन गृहमंत्री ने त्रिभाषा फार्मूला देकर हिन्दी को कमजोर करने का कार्य किया। इससे उसको उचित स्थान आज तक नहीं मिल सका। गोष्ठी में सात सूत्री प्रस्ताव पारित किया गया। गोष्ठी में बाबूलाल शर्मा, जय प्रकाश पाण्डेय, डॉ. संतोष कुमार तिवारी, डॉ. ओमप्रकाश, संगीता शुक्ला, सौरभ मालवीय व अन्य उपस्थित थे।
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