रायबरेली। अवध केसरी राना बेनी माधव बक्श सिंह की 222वीं की शाम देश और दुनिया में अपनी प्रतिभा मनवाने वाले कवियों और शायरों से सजीं। शहर स्थित राना बेनी माधव बक्श सिंह स्मृति सभागार में आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आगाज कवयित्री मणिका दुबे की सरस्वती वंदना से हुआ। उन्होंने पढ़ा ‘आरती की थाल सजाओ री..वीणापाणि मां को मनाओ जी..सब मिल करें आज मां का वंदन... चरणों मे फूल बिछाओ जी, बिदियां में हीरे जड़ाओ री, देवता भी करते हैं मैया का चंदन...पर श्रोता भक्तिरस में भावविभोर हो गए। कवि सम्मेलन में जिले के कवि और गीतकार राहुल सफर ने राना बेनी माधव की स्मृति में तैयार सभागार पर पढा 'ये जो रोशन दिए यहां बुलाएं गए हैं...एक दिया यहाँ जो बुझ गया है उसी से सब जलाएं गए हैं...''इसके अलावा उन्होंने अवधी में कई गीत सुनाएं। लखनऊ से आए श्रंगार रस कवि दिव्यांशु अवस्थी ने पढ़ा 'सर को मेरे कांधे का कभी टेक ना मिला, हर मोड़ पे दिलदार मुझे नेक ना मिला, व्रत मैंने किये सोलहो सोमवार के मगर, सारे जहां में तुमसा कोई एक ना मिला।'कोबरा छत्तीसगढ़ से आए हास्य कवि हीरा मणि वैष्णव ने अपने व्यंग्य और कविताओं से लोगों को गुदगुदाया।

उन्होंने पढ़ा 'बेशक तुम्हारा भाव बढ़ा हो चीनी की तरह, हम भी डिमांड पर हैं इथेनॉल की तरह'। कवयित्री हिमांशी बाबरा ने पढ़ा 'मेरी आवाज पे बेशुद चले आने वाला, था कोई शख्स मुहब्बत के घराने वाला, उम्र भर राह गुज़र मुझसे भी देखी ना गयी, खैर वो था भी नहीं वादा निभाने वाला।' अमेठी से आए कवि प्रदीप तिवारी ने पढ़ा बस्तियों में गुलाबों के है घर तेरा, पर गुलाबों से ज्यादा तू मशहूर है, संगमरमर सी तू आ तराँशु तुझे, यार तेरा खुजराहों का मजदूर है।' कुरुक्षेत्र से आए कवि विष्णु विराट ने पढ़ा 'जुगनुओं ने शराब पी ली है, अब ये सूरज को गालियाँ देंगे, आज जो बैठने नहीं देते, आप इक रोज कुर्सियां देंगे। राजस्थान से वीर रस के कवि मोहित शौर्य ने राना बेनी माधव बक्श सिंह की स्मृति में पढ़ा' शेर दिलेर-ए-जंग सफर में तांडव करता जाता था...शत शत नमन तुम्हे अवध के महाराणा प्रताप। शाम में एक रोमांटिक मोड़ तब आया जब कवयित्री मणिका दुबे मंच पर लौटीं और अपनी मधुर गीतों और ग़ज़लों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने पढा' शहर के शोर में वीरानियाँ हैं, यहाँ तुम हो मगर तन्हाइयां हैं, वहीं पे बैठे के अरसा गुजारूं, जहां तेरी मेरी परछाईयाँ हैं। डॉ. भावना श्रीवास्तव ने पढ़ा' भरोसा हो न हो दुनिया पे लेकिन, मुहब्बत पर भरोसा कीजिएगा। ग्वालियर से आए शायर अतुल अजनबी ने पढ़ा' हमने जब ऐतबार किया सर्द रजत पर, सूरज उदास हो गया इतनी सी बात पर, कश्तियाँ डूब रही हैं यहाँ एक-एक कर के और हम खुश हैं कि पतवार सँभाले हुए हैं।' जिले की शायरा तारा इकबाल ने पढ़ा तुम जो खुश हो चलो यह भी गवारा हम को, वर्ना हम और तुम्हे इस तरह जाने देते। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे श्रृंगार रस के बड़े हस्ताक्षर कवि स्वयं श्रीवास्तव ने अपनी पुरानी कविताओं के साथ में पढ़ा' मुश्किल थी संभलना ही पड़ा घर के वास्ते, फिर घर से निकलना ही पड़ा घर के वास्ते, मजबूरियों का नाम हमने शौक़ रख दिया, हर शौक बदलना ही पड़ा घर के वास्ते। कार्यक्रम के आखिर में देश और दुनिया में अपनी शायरी से नाम कमा चुके गजल और शायरी की दुनिया के बड़े हस्ताक्षर मंजर भोपाली ने पढ़ा ' बेटियों के भी लिए हाथ उठाओ मंज़र, सिर्फ अल्लाह से बेटा नहीं मांगा करते। इसके साथ ही उन्होंने समिति की तरफ से सरकार की मदद से तैयार कराए गए बड़े सभागार की तारीफ करते हुए कहा कि आपने रायबरेली के लिए एक ताजमहल दे दिया है।