1857 की क्रांति के अवध केसरी थे राना बेनी माधव - योगी
रायबरेली। बैसवारे की माटी में जन्मे अमर सेनानी एवं 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक अवध केसरी राना बेनी माधव बक्श सिंह की 222वीं जयंती पर सोमवार को भाव समर्पण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार राना बेनी माधव बक्श सिंह स्मृति सभागार का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सभागार जनपदवासियों के लिए उपयोगी होने के साथ ही राना साहेब की स्मृति को हमेशा जीवंत रखेगा। यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अवध केसरी राना बेनी माधव बक्श सिंह को एक उज्ज्वल नक्षत्र के रूप में याद करेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। साथ ही ‘अवध केसरी स्मारिका’ का विमोचन तथा राना बेनी माधव बक्श सिंह के सम्मान में डाक विभाग का विशेष आवरण जारी किया गया। समारोह से पूर्व मुख्यमंत्री ने नेहरू नगर चौराहे पर स्थापित राना बेनी माधव बक्श सिंह की अश्वारोही प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। स्मारक समिति के अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह, संरक्षक इंद्रेश विक्रम सिंह, पूर्व एमएलसी राजा राकेश प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष राकेश भदौरिया एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख उमेश सिंह ने मुख्यमंत्री का त्रिशूल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।
18 महीने तक अंग्रेजों से किया संघर्ष
भाव समर्पण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बैरकपुर से मंगल पांडेय के नेतृत्व में उठी स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी ने 1857 में विकराल रूप ले लिया। मेरठ में धवन सिंह गुर्जर, बुंदेलखंड में रानी लक्ष्मीबाई और कानपुर में नाना साहेब ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया। उसी प्रकार अवध क्षेत्र में हजारों सैनिकों के साथ राना बेनी माधव बक्श सिंह ने 18 महीने तक अंग्रेजों से संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि राना बेनी माधव बक्श सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करने वाले राजा चंद्रिका बख्श सिंह, लालचंद्र स्वर्णकार और सेनापति वीरा पासी के योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री ने सभागार के द्वितीय चरण के कार्य में इन वीर योद्धाओं की प्रतिमाएं भी परिसर में स्थापित किए जाने पर जोर दिया, ताकि यहां आने वाली युवा पीढ़ी उनके त्याग और शौर्य से प्रेरणा ले सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आजादी राना बेनी माधव बक्श सिंह जैसे हजारों वीरों और शहीदों के बलिदान का परिणाम है। शहीद हमारी धरोहर हैं और उनकी स्मृतियों को सुरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्मारक समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समिति के निरंतर प्रयासों से रायबरेली को यह भव्य सभागार मिला है। इसके संचालन और अमर सेनानियों के इतिहास से युवा पीढ़ी को जोड़ने की जिम्मेदारी भी समिति की है। मुख्यमंत्री ने वीरांगना सुमन यादव, कृष्णावती, ललिता देवी और ज्ञानवती को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
रायबरेली के इतिहास को किताबों तक सीमित न रखें : जयवीर सिंह
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि रायबरेली को मिली यह सौगात राना बेनी माधव बक्श सिंह स्मारक समिति के समर्पण और दूरदृष्टि का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राना बेनी माधव बक्श सिंह राष्ट्रीय गौरव हैं। उन्होंने अवध क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ अपनी सेना के साथ बड़ा संघर्ष किया था। रायबरेली की आस्था, वीरता और लोकसंस्कृति की अपनी अलग पहचान है। जिले के गौरवशाली इतिहास को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
प्रभारी मंत्री राकेश सचान ने कहा कि राना बेनी माधव बक्श सिंह ने 18 महीने तक अंग्रेजों से लोहा लिया और अवध क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। विधायक अदिति सिंह ने कहा कि राना साहेब हमारे पूर्वज रहे हैं और पूर्वजों का सम्मान करना ही हमारा स्वाभिमान है। उनकी स्मृति में बना सभागार जनपदवासियों के लिए उपयोगी साबित होगा। कार्यक्रम का संचालन अर्चना सतीश ने किया। इस अवसर पर मंत्री डॉ. मनोज पांडेय, राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह, विधायक अशोक कुमार समेत स्मारक समिति के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।
शौर्य और साहित्य सम्मान से विभूतियां सम्मानित
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की ओर से राना बेनी माधव बक्श सिंह शौर्य सम्मान से कारगिल युद्ध के सूबेदार मेजर शत्रोहन सिंह तथा ऑपरेशन सिंदूर में विशिष्ट सेवा के लिए मेजर जनरल दिगेंद्र प्रताप सिंह को सम्मानित किया गया। डॉ. शिव बहादुर सिंह भदौरिया साहित्य सम्मान पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु सिंह और साहित्य भूषण सम्मान डॉ. महेशचंद्र दिवाकर को प्रदान किया गया।
वीरा पासी सम्मान अशोक तपस्वी एवं रोटरी सेवा सदन समिति, रायबरेली को दिया गया। लालचंद्र स्वर्णकार मेधा सम्मान संस्कार अग्रहरि और शौर्य प्रताप सिंह, स्व. गजाधर सिंह मेधा सम्मान दिया और सेजल तथा स्व. श्रीमती जनक सिंह मेधा सम्मान महक और समीक्षा को प्रदान किया गया। इसके अलावा अवध क्षेत्र के 15 जनपदों से आए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीदों के परिजनों को भी सम्मानित किया गया।