प्रभु की निंदा करना तो दूर सुनना भी नहीं चाहिए-प्रणव पुरी महा
फिरोजाबाद, अखिल भारतीय देववाणी परिषद एवं संस्कार भारती के तत्वाधान में श्री राम चन्द्र पालीवाल ऑडिटोरियम में आयोजित शिव महापुराण के चतुर्थ दिवस की भागवत कथा , डॉ देवेंद्र शास्त्री और गौरव गोयल ने व्यास गद्दी का पूजन और आरती कर शुभारम्भ किया
शिव महा पुराण कथा के दौरान प्रणव पूरी जी महाराज ने माता सती के विषय में वर्णन किया, पूज्य महाराज श्री ने वर्णन करते हुए कहा
माता सती ने बचपन से ही भगवान शिव की प्राप्ति के लिए तपस्या की और उन्हें प्राप्त किया।
विवाह के पश्चात माता ने शिव से ज्ञान और भक्ति के विषय में पूछा
शिव भगवान ने 9 प्रकार की भक्ति का उपदेश किया।
श्रवण भक्ति उसमें पहली है। उन्होंने कहा।
बिना कानों से सुने भगवान को जानना अत्यंत कठिन है।
कथा के आगे प्रसंग में सती मोह की कथा आती है, उनने प्रभु श्रीराम को देखकर साधारण मनुष्य समझा और उनकी परीक्षा ली।
इसी कारण भोलेनाथ ने उनका त्याग कर दिया।
माता सती ने अपने पिता के घर यज्ञ में शिव अपमान देखा तो सह न सकी सभी को श्राप देकर देह त्याग किया। इस कथा के द्वारा हमे शिक्षा लेनी चाहिये कि हमे प्रभु की निंदा करना तो दूर सुनना भी नहीं चाहिए।
आगे कथा में महामृत्युंजय मंत्र की महिमा बताई
एवं हिमालय मैना के घर
माता पार्वती का दिव्य जन्म प्रसंग रहा. आज की कथा में
भक्तों की भीड़ बहुत ज्यादा दिखी और ऊपर बालकनी भी हॉउसफुल दिखी।
कथा के अवसर पर संजय पांडेय, देवब्रत पांडेय, धीरेन्द्र भारद्वाज, ब्रजेश यादव, अर्चना दुबे, लता शर्मा,राजेश दुबे, आदर्श, सजल अग्रवाल, गौरव गोयल, दीपक अग्रवाल, प्रशांत अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
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लेखक के बारे में
रविंद्र वर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के फिरोज़ाबाद ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय मुद्दों पर ज़मीनी पकड़ के साथ वह समाचार कवरेज और रिपोर्टिंग का कार्य कर रहे हैं।
