सिपाही ने अखिलेश यादव को किया हैशटैग,वीडियो किया गया बैन
रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात सिपाही ने खोली थी पोल
सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ वीडियो
लखनऊ। राजधानी की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात एक सिपाही ने आईपीएस अधिकारियों की काली करतूतों का चिटठा खोल दिया। सिपाही ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से वीडियो जारी कर आईपीएस अधिकारियों पर लाखों की वसूली के गंभीर आरोप लगाए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। सिपाही के इस वीडियो को 19 हज़ार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया। तीन हज़ार से ज्यादा लोगों ने शेयर किया। जबकि सत्रह सौ से ज्यादा कमेंट किये गए। वहीं इस वीडियो के वायरल होने के बाद लखनऊ पुलिस की जमकर बदनामी हुई है। सिपाही ने इस वीडियो में सपा प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई न्यूज चैनल को हैशटैग किया था। अब इस वीडियो को बैन कर दिया गया है।
गौरतलब है कि गुरूवार वीडियो जारी करते हुए कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला ने आरोप लगाया था कि रिजर्व पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने के नाम पर पुलिसकर्मियों से हर महीने अवैध वसूली की जाती है। गार्ड कमांडर के माध्यम से सिपाहियों और दीवानों से करीब दो हजार रुपए प्रति माह लिए जाते हैं। कहा था कि पुलिस विभाग को काले अंग्रेज चला रहे हैं। गणना प्रभारी, आरआई और अन्य अधिकारी इस व्यवस्था में शामिल हैं। वसूली की रकम नीचे से ऊपर तक अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है। कांस्टेबल ने दावा किया कि लखनऊ कमिश्नरेट में एक डेटा सेक्शन में 110 से 120 गार्ड तैनात हैं, जहां 500 से 550 ड्यूटी लगाई जाती हैं। आरोप है कि करीब 400 पुलिसकर्मियों से हर महीने दो-दो हजार रुपए वसूले जाते हैं, जिससे लगभग 8 लाख रुपये की उगाही होती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी वसूली कई अन्य जगहों पर भी की जा रही है। वीडियो में कांस्टेबल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग के भीतर से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है, इसलिए सरकार को सीधे कार्रवाई करनी चाहिए। जिसके बाद लखनऊ पुलिस का बयान आया था कि इस मामले को संज्ञान लेते हुए लखनऊ पुलिस कमिश्नर ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है। पुलिस कमिश्नरेट ने सफाई देते हुए कहा है कि ड्यूटी लगाने के लिए निर्धारित एसओपी का पालन किया जाता है,जिसकी मॉनिटरिंग राजपत्रित अधिकारी करते हैं। पूरे मामले की जांच एडीसीपी पुलिस लाइन को सौंपी गई है। वहीं शुक्रवार सिपाही ने वीडियो जारी करते हुए कहा है कि जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं वही इस मामले की जांच भी कर रहे हैं।
पुलिस ने रूल्स और मैनुअल्स का दिया हवाला
ये खबर भी पढ़े : मोहर्रम पर्व को लेकर पुलिस अलर्ट, एसपी ग्रामीण ने किया ताजिया जुलूस मार्ग का निरीक्षणइस मामले में लखनऊ पुलिस ने पुलिस रूल्स एन्ड मैनुअल्स का हवाला देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत प्रत्येक पुलिसकर्मी की शिकायतों के निवारण हेतु विभाग में एक सुस्थापित एवं प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विद्यमान है। विभिन्न स्तरों पर की गई किसी भी शिकायत पर गंभीरता से संज्ञान लिया जाता है। प्रस्तुत प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रारम्भ कर दी गई है एवं जांच की निष्पक्षता को बनाए रखने हेतु पुलिस लाइन का पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारियों से पृथक अधिकारियों को जांच सुपुर्द की गई है। साथ ही, उत्तर प्रदेश पुलिस की सोशल मीडिया पॉलिसी के अंतर्गत समस्त पुलिसकर्मियों को विभागीय मामलों को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से स्पष्टतः निषिद्ध किया गया है। शिकायत के लिए विभागीय चैनल उपलब्ध हैं - सोशल मीडिया उसका माध्यम नहीं है। इस संबंध में भी नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। उत्तर प्रदेश पुलिस एक अनुशासित बल है तथा विभागीय नियमों एवं मर्यादाओं का पालन सभी स्तरों पर समान रूप से अपेक्षित है।
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लेखक के बारे में
पिछले छह वर्षों से क्राइम रिपोर्टिंग में सक्रिय सत्य प्रकाश भारती अपराध से जुड़े मामलों पर गहरी पकड़ रखते हैं। तथ्यपरक रिपोर्टिंग और संतुलित प्रस्तुति उनकी कार्यशैली की पहचान है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में कार्यरत हैं।
