इस जिले में गंदे काम में धकेली जा रही लड़कियां

 अरवल। नाच-गाने की आड़ में अरवल के रिहाइशी इलाके में लंबे समय से देह व्यापार की मंडी सज रही है। इस धंधे के लिए ओडिशा, बंगाल, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों से गरीब परिवार की लड़कियां लाई जाती हैं। इसके लिए बकायदा कॉन्‍ट्रैक्ट किया जाता है।

कोठे की मालकिन और लड़कियों के परिवार के बीच 10 रुपये से 100 रुपये तक के स्टांप पेपर पर नियम व शर्तें लिखी जाती हैं। मात्र 50 हजार से दो लाख तक बेटियां बेच दी जाती हैं।

इसके बाद शुरू होता है, उनकी आकांक्षाओं को गुलामों की तरह रौंदने का दौर। यह राजफाश पूर्व में रेड लाइट एरिया से पकड़ी गईं लड़कियों ने पुलिस के समक्ष किया था।

एक वर्ष का यह कॉट्रैक्ट दिखावे के तौर पर नाच-गान के लिए किया जाता है। यहां लाकर उसके जिस्म का सौदा शुरू कर दिया जाता है। विरोध करने पर कई तरह की प्रताड़ना दी जाती है।

पुलिस यहां अक्सर दबिश देती है और लड़कियों को पकड़कर थाने लाती है, लेकिन कॉन्‍ट्रैक्ट पेपर के आधार पर वह छूटकर फिर से उसी धंधे में लिप्त हो जाती हैं। रात को जब शहरवासी सो जाते हैं, तब यहां शराब और शबाब का दौर शुरू हो जाता है।

एसपी से एक ने लगाई थी गुहार, सभी नहीं कर पातीं साहस
नाबालिग लड़कियों की तस्करी की सूचना पर गत 13 नवंबर को पुलिस ने चार नर्तकियों को हिरासत में लिया था, जिन्हें पूछताछ के बाद अल्पावास गृह भेज दिया गया। गत अक्टूबर महीने में ऐसी ही 11 लड़कियों को पुलिस ने मुक्त करा देह व्यापार के दलदल से बाहर निकाला था।

एक लड़की के हाथ मोबाइल लग गया था, जिससे सीधे एसपी मो कासिम को काल करके मदद की गुहार लगाई थी। इनमें दो नाबालिग थीं। दो दलालों पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया था। हर लड़की इस तरह का विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती।

इस कारण, देह व्यापार का यह धंधा बदस्तूर चल रहा है। गत तीन सितंबर को पुलिस ने पांच युवकों के साथ आठ लड़कियों को आपत्तिजनक हालत में गिरफ्तार किया था। शराब भी जब्त की गई थी।

इसके पहले गत 13 अप्रैल को ओडिशा की 15 लड़कियां बरामद की गईं थी। तब रेड लाइट एरिया में संचालित मनोरमा थिएटर के मालिक विजय कुमार और उसके पुत्र विक्रम कुमार पर देहव्‍यापार कराने का मुकदमा किया गया था।

नशा करने को किया जाता बाध्य
रेस्क्यू की गई लड़कियां छह से नौ माह पूर्व यहां लाई गई थी। इन लड़कियों ने पुलिस के समक्ष यह भी राजफाश किया था कि उन्हें नशा करने के लिए भी बाध्य किया जाता था। इस कारण कई लड़कियां नशे की आदी हो गईं। अब नशे की खातिर कुछ भी करने को राजी हो जाती हैं।

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