अपर मुख्य सचिव ने जलवायु परिवर्तन के तीन दिवसीय सम्मेलन का किया शुभारंभ

एनबीआरआरआई और नेसा,शोध के क्षेत्र में नई उड़ान भरने को तैयार

अपर मुख्य सचिव ने जलवायु परिवर्तन के तीन दिवसीय सम्मेलन का किया शुभारंभ

  • प्रदूषण की रोकथाम पर वैज्ञानिकों का शुरू हुआ मंथन

लखनऊ। राजधानी में जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की रोकथाम के लिए वैज्ञानिकों का मंथन शुरू हो गया है। गुरुवार को सीएसआईआर-एनबीआरआई और राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान अकादमी के द्वारा पर्यावरणीय मुद्दों पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मलेन का शुभारंभ मुख्य अथिति उप्र के अपर मुख्य सचिव डॉ.देवेश चतुर्वेदी एवं संस्थान निदेशक डॉ.अजीत कुमार शासनी नेसा के सेक्रेटरी आरके सिन्हा द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।ज्ञात हो कि यह सम्मेलन एनबीआरआई और नेसा के सहयोग से 16 दिसम्बर तक मध्य ग्रीन केमिस्ट्री, प्रदूषण रोकथाम एवं जलवायु परिवर्तन पर आधुनिक प्रवृत्तियों,चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। शुभारंभ के दौरान संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं सम्मेलन के संयोजक डॉ. पंकज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पर्यावरण विज्ञान पर केन्द्रित, पर्यावरण और जैव प्रौद्योगिकी,पर वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञों द्वारा 80 से ज्यादा मौखिक रूप प्रस्तुतियां, 110 पोस्टर प्रस्तुतियों के द्वारा परिचर्चाए की जाएगी।इसके साथ ही देश के नामी विषय विशेषज्ञों द्वारा 13  मुख्य व्याख्यानों की प्रस्तुति देंगे।

वहीं नेसा के कार्यकारी अध्यक्ष आरके सिन्हा ने अकादमी के निर्धारित लक्ष्यों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तरों पर विभिन्न कार्यक्रमों संगोष्ठियों के आयोजन द्वारा हम जनमानस में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।साथ ही अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. अजित कुमार शासनी ने कहा कि इस सम्मेलन में सृजित निर्देशों एवं सुझावों के द्वारा हमें प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन की नई चुनौतियों के हल खोजने में अवश्य सहायता मिलेगी।सम्मेलन में राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान अकादमी के पुरस्कारों की भी घोषणा की गयी।

इसी क्रम में डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने अकादमी द्वारा सम्मानित सभी वैज्ञानिकों शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि हम विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों से निपटने के लिए बेहतर तकनीकी विकास और उनकी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें देखते हुए इस सम्मेलन का विषय बहुत प्रासंगिक है। डॉ.चतुर्वेदी ने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालय द्वारा इस सम्मेलन की सिफारिशों और कार्रवाई को हितधारकों तक अवश्य पहुचाना चाहिए ताकि इन मुद्दों से निपटने के लिए उचित नीतियां समय पर बना सकें।

हाल के पर्यावरणीय मुद्दों पर चर्चा करते हुए डॉ.चतुर्वेदी ने कहा कि हमें अपनी मानवता को प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खतरनाक परिणामों से बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करने होंगे। वहीं सम्मेलन में फ़्लोरा फौना साइंस फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक विशेष सत्र में  डॉ. अजित कुमार शासनी द्वारा तीसरा प्रो. सुशील कुमार द्वारा स्मृति व्याख्यान प्रस्तुत किया गया । सत्र में फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व निदेशक, सीएसआईआर-सीमैप डॉ. एसपीएस खनुजा भी उपस्थित रहे। जिसमें प्रतिभागियों  द्वारा कुल 28 मौखिक व्याख्यानों के एक साथ साथ 28 पोस्टर प्रस्तुतियों को प्रस्तुत किया।

Tags: lucknow

About The Author

Latest News