बिहार की तस्वीर बदल रहे हैं सीएम नीतीश कुमार

उद्योगों का बिछ रहा है जाल, रोजगार के अवसर होंगे अपार: राजीव रंजन  

बिहार की तस्वीर बदल रहे हैं सीएम नीतीश कुमार

पटना: राज्य के औद्योगिक विकास के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता राजीव रंजन ने आज कहा है कि बिहार के सड़क, बिजली पानी की व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने के बाद अब सरकार का पूरा फोकस राज्य के औद्योगिक सशक्तिकरण पर लगा हुआ है. इन्वेस्टर समिट के जरिये राज्य में 31 हजार करोड़ के निवेश की चल रही बात सरकार के इन्हीं प्रयासों की एक कड़ी है. वास्तव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों से जल्द ही आने वाले कुछ वर्षों में बिहार की तस्वीर बदलने वाली है.

उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं को उद्योगों के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार कई योजनायें चला रही हैं. बिहार स्टार्ट अप नीति 2022 के तहत स्टार्ट अप को 10 लाख रु का 10 साल तक के लिए ब्याज मुक्त सीड फंड दिया जा रहा है. साथ ही इन्हें बिहार औद्योगिक नीति 2023 के तहत मिलने वाले सभी लाभ भी दिए जा रहे हैं. इसी तरह बिहार में लॉजिस्टिक्स नीति के तहत राज्य में लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयर हाउस, इनलैंड कंटेनर डिपो, कोल्ड चेन आदि को 10 प्रतिशत ब्याज प्रतिपूर्ति के साथ 60 करोड़ रूपये प्रदान किये जा रहे हैं. इसके अलावा इन्हें अचल पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत व अधिकतम 25 करोड़ रु तक का अनुदान भी मुहैया करवाया जा रहा है.

जदयू महासचिव ने कहा कि सरकार के प्रयासों से लोगों का बिहार में निवेश करने के प्रति आकर्षण अब बढ़ने लगा है. इससे न केवल रोजगार के अवसरों में अपार वृद्धि होगी बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा.

उन्होंने कहा कि यह सब बिहार अपने दम पर कर रहा है. यदि केंद्र सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दे देती तो राज्य में निवेश करने की होड़ में बेतहाशा वृद्धि होती. गौरतलब हो कि विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों में निजी पूंजी निवेश के तहत अगर कोई उद्योग या कल-कारखाना लगाना चाहे, तो उसे उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, आय कर, बिक्री कर और कॉरपोरेट टैक्स जैसे केन्द्रीय करों में विशेष छूट मिलती है. इसके अलावा विशेष दर्जा प्राप्त राज्य को केंद्र द्वारा अपनी विभिन्न योजनाओं के मद में राज्यों को मिलने वाली वित्तीय मदद में मात्र 10 प्रतिशत क़र्ज़ के रुप में और बाक़ी 90 प्रतिशत की वित्तीय मदद बतौर अनुदान मिल जाती है. इससे राज्यों का बोझ कम होता है और होने वाली बचत को अन्य विकास कार्यों में खर्च करने का मौका मिल जाता है. यदि केंद्र बिहार को विशेष दर्जा दे दे तो राज्य को रिकॉर्ड समय में विकसित बनने से कोई नहीं रोक सकता.

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