डाॅ. बीपी त्यागी ने कहा उनके द्वारा की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं को प्रमुखता से उठाया चौथे स्तंभ ने

राकेश मार्ग स्थित एक फैक्ट्री के कैमिकल से दूषित पानी बना जहर ये है सरकारी अमला : डाॅ. बीपी त्यागी

डाॅ. बीपी त्यागी ने कहा उनके द्वारा की जा रही स्वास्थ्य सेवाओं को प्रमुखता से उठाया चौथे स्तंभ ने

गाजियाबाद। ( तरूणमित्र ) डॉ बीपी त्यागी कहते हैं कि उनके द्वारा की जा रही स्वास्थ्य की जानकारी को सपोर्ट कर रहा है ये हमारा चौथा स्तंभ, उन्होंने कहा कि आपको याद होगा 5/4/24 रविवार के दिन उनके द्वारा कैला भट्ठा में जो स्वास्थ्य कैम्प लगाया गया था उसमें डॉ बीपी त्यागी स्वास्थ्य प्रभारी राष्ट्रवादी नव निर्माण दल ने कैला भट्ठा की जल सप्लाई पर सवालिया निशान लगाया था वो आज आपके सामने है। अब ये भी बता देते हैं कि ट्रिपल इंजन की सरकार आपको क्या दे रही है इस गंदे पानी में 1-arsenic -जो एक स्लो पाइजन है!! 2-petrochemicals- जो एक स्लो पाइजन दे रही है!! 3-heavy metals- जो एक स्लो पाइजन है!! 4-pesticide- जो घातक ज़हर है !! 5-Nitrates- जो छोटे बच्चों के दिमाग़ व रीड की हड्डी को ख़राब कर रहा है!! 6-Benzine -जो कैंसर पैदा करता है!! 7-chlorinated system Disorder- जिससे बाँझ पन होता है!! जितने भी स्लो पाइजन हैं वो धीमे-धीमे सारे शरीर को डैमेज करते हैं। डाॅ. त्यागी ने कहा कि अब बड़ा सवाल ये है कि क्या ट्रिपल इंजन की सरकार समूचे ग़ाज़ियाबाद को स्लो पाइजन देना चाहती है। इस बात को उन्होंने इस लिए कहा चूंकि हाल ही में नेहरू नगर के भाटिया मोड़ स्थित एक क्राॅकरी बनाने वाली फैक्ट्री में कैमिकल के पानी का धरती में समाया जाना मतलब स्लो पाइजन देने जैसा है और इसकी शिकायतें भी खूब करी जा रही हैं लेकिन सरकारी अमले की अनदेखी के चलते आम नागरिक जहर पी रहा है, उन्होंने कहा कि आखिर बीमारियों से कैसे बचा जाये जब दबंगों के द्वारा लगातार मनमानी की जा रही है। इस पर न तो जनप्रतिनिधि बोलने को तैयार हैं न ही सरकारी अमला। डॉ. बीपी त्यागी ने कहा कि मामला चिंताजनक है। राकेश मार्ग स्थित न्यू आनंद विहार काॅलोनी भाटिया मोड़ पर प्लास्टिक यानि क्राकरी बनाने वाली फैक्ट्री में कैमिकल के पानी का निस्तारण अंदर ही होने से समूचे क्षेत्र में दूषित पानी बना जहर, लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करती क्राकरी फैक्ट्री से न जाने कितनों की जीवन लीला समाप्त हो सकती है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता, इसके बावजूद फैक्ट्री मालिक के हौसले बुलंद हैं और लोगों की जान की कीमत के आगे फैक्ट्री मालिक को पैसे से अधिक प्यार है। जरा सोचिये अगर ऐसी मानसिकता का परिचय दिया जा रहा है तो जाहिर तौर पर फैक्ट्री मालिक के हौसले बुलंद होने का सीधा मतलब यही है कि बड़े नेताओं या फिर अधिकारियों का सिर पर हाथ है। क्या सरकारी अमला भी इसी ताक में बैठा है कि कोई बड़ा हादसा हो तब वह नींद से जागेंगे। गजब की तानाशाही और लोगों की जान पर बन आई, वाह री सरकार तेरे खेल निराले और यहां दूषित पानी पीकर लोगों की जान के पड़ गए लाले। आखिर इन्हें क्यों न कहा जाए फैक्ट्री माफिया चूंकि लोगों की जान की कीमत इनकी नजर में जीरो है। लोगों की मानें तो उन्हें अब इस बात का डर सताने लगा है कि कहीं ये जहरीला पानी उनकी या फिर उनके परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई अप्रिय घटना न घटा दे। दहशत के माहौल में जीने को मजबूर हैं यहां के वासी, लोगों में अब सुगबुगाहट का माहौल पैदा हो गया है कोई कहता है फैक्ट्री मालिक की सीधी बात मंत्रियों से है तो कोई कहता है फैक्ट्री मालिक की सीधी बात बड़े-बड़े अधिकारीयों से है... खैर जो भी हो लेकिन जहर घोलती फैक्ट्री से लोगों की जान बचाने का काम अधिकारियों का है उनकी जिम्मेदारी है कि उन्हें पता लगने पर तत्काल प्रभाव से लोगों की जान बचाने के लिए इस फैक्ट्री पर कार्रवाही करना चाहिए। अब सोचिये कि इस दूषित जहरीले पानी को कितने लोग पी रहे हैं जिन्हें इस बात का इल्म नहीं है कि वह जहर पी रहे हैं। फैक्ट्री मालिक को पता होने के पश्चात भी कान पर जूं न रेगना मतलब साफ है कि इसमें अधिकारियों की सांठ गांठ की बू आ रही है।

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