केजीएमयू माइक्रोकॉन में विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

केजीएमयू माइक्रोकॉन में विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

लखनऊ। केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा चल रहे इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट माइक्रोकॉन 46 वाँ समारोह में देश विदेश के वक्ताओं अपने सुझाव व्यक्त किए।शनिवार को 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वक्ताओं ने व्याख्यान दिये। जिसमें मेलिओडोसिस क्लिनिशियन का परिप्रेक्ष्य प्रो प्रशांत रघब महापात्रा पल्मोनरी मेडिसिन विभाग, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भुवनेश्वर ,प्रो. नेगी एर्ज़सेबेट, सेज्ड विश्वविद्यालय, सेमेल्विस, हंगरी शामिल थे।
 
डॉ. चंद वट्टल, सर गंगा राम अस्पताल, नई दिल्ली, प्रोफेसर नयना इंगोले, टीएनएमसी और बीवाईएल नायर चैरिटेबल हॉस्पिटल, मुंबई, डॉ. प्रिया अब्राहम, सीएमसी, वेल्लोर, डॉ. निवेदिता गुप्ता, आईसीएमआर, डॉ. शशांक पुवार और सत्रों का आयोजन सात समानांतर सत्रों में किया गया।
 
पैनल चर्चा और ओपन हाउस बहस "नया पीजी पाठ्यक्रम क्या हम वास्तव में क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट तैयार कर रहे हैं "प्रो विजयश्री देवतोले, महात्मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, वर्धा ,डॉ. अनूप वेलायुधन, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, डॉ. विद्या केआर, उप निदेशक, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, तिरुवनंतपुरम द्वारा 'संक्रामक रोगों में एक स्वास्थ्य अवधारणा' पर संगोष्ठी की गई। साथ ही "क्रॉसरोड्स पर क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी: जीनोमिक्स टू प्रिसिजन मेडिसिन" विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
 
गुप्त टीबी की जांच के लिए एलिसपोट-आधारित आईजीआरए टी-स्पॉट टीबी परीक्षण प्रोफेसर अमिता जैन, प्रो. सूर्यकांत और डॉ शीतल वर्मा द्वारा लॉन्च किया गया था।सम्मेलन के दौरान विभिन्न प्रतिनिधियों द्वारा नए शोध कार्यों को प्रदर्शित करने वाले 500 से अधिक मौखिक और पोस्टर की गतिविधियां की गई।
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