निघासन-खीरी,26 अगस्त(तरुणमित्र)। तहसील क्षेत्र में जश्ने ईदुल मिलादुन्नबी का पर्व बुधवार को बड़े ही उत्साह, अकीदत, सिद्दत और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा ﷺ की पैदाइश की खुशी में क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों और गांवों में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। सुबह से ही मस्जिदों, मदरसों और घरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। जगह-जगह मिलाद शरीफ, नातख्वानी और सलातो-सलाम की महफिलें आयोजित की गईं।
क्षेत्र के बरोठा, झंडी, लालपुर, मूड़ा, बिनौर, हरसिंगारपुर, मिर्जागंज समेत आसपास के कई गांवों में जश्ने ईदुल मिलादुन्नबी की खास रौनक देखने को मिली। सुबह से ही बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं में पर्व को लेकर खासा उत्साह रहा। लोग नए कपड़े पहनकर एक-दूसरे को ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद देते नजर आए। गलियों और मोहल्लों में बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था।
सिर पर टोपी, चेहरों पर रौनक और गूंजती रही नात-ए-पाक
पर्व के दौरान गांवों का माहौल पूरी तरह खुशनुमा नजर आया। छोटे-छोटे बच्चे नए कपड़ों में सिर पर टोपी पहने अपने परिवार के साथ कार्यक्रमों में शामिल हुए। बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। जगह-जगह नातख्वानों की आवाज में नात-ए-पाक का कलाम गूंजता रहा, जिससे पूरा माहौल आध्यात्मिक और उल्लासपूर्ण बना रहा।
कई परिवारों ने अपने बच्चों के साथ मिलकर घरों में भी खुशी मनाई। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां, सेवइयां और विभिन्न प्रकार के पकवान बांटकर खुशी का इजहार किया। बच्चों को भी मिठाइयां खिलाई गईं। घरों और मोहल्लों में मेहमानों का स्वागत किया गया। लोगों ने पर्व की खुशियां आपस में बांटते हुए भाईचारे और मोहब्बत का संदेश दिया।
उलेमाओं ने बयान की पैगंबर साहब की सीरत
विभिन्न गांवों में आयोजित मिलाद शरीफ की महफिलों में उलेमा-ए-किराम और मौलानाओं ने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की सीरत-ए-पाक और उनके जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि पैगंबर साहब ने पूरी इंसानियत को मोहब्बत, रहमदिली, इंसाफ, भाईचारे और अमन का संदेश दिया। उनकी जिंदगी मानवता के लिए एक आदर्श है।
उलेमाओं ने लोगों से पैगंबर साहब की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने, पड़ोसियों के साथ अच्छा व्यवहार करने तथा समाज में आपसी प्रेम और भाईचारा कायम रखने की अपील की। महफिलों में मौजूद लोगों ने भी इन संदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
सलातो-सलाम के साथ मांगी गई अमन-चैन की दुआ
कार्यक्रमों के दौरान नातख्वानों ने नात-ए-पाक पेश की। इसके बाद अदब और एहतराम के साथ सलातो-सलाम पेश किया गया। महफिलों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई।
लोगों ने कहा कि जश्ने ईदुल मिलादुन्नबी केवल खुशी मनाने का अवसर ही नहीं, बल्कि पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं को याद करने और उन्हें अपने व्यवहार में उतारने का भी अवसर है। मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे का संदेश समाज को मजबूती प्रदान करता है।
शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया पर्व
जश्ने ईदुल मिलादुन्नबी के दौरान क्षेत्र के गांवों में लोगों ने आपसी सौहार्द और भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से पर्व मनाया। कहीं कोई अप्रिय स्थिति न बने, इसके लिए स्थानीय स्तर पर भी लोग सजग नजर आए। बुजुर्गों ने युवाओं और बच्चों को शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से पर्व मनाने की सीख दी।
बरोठा से लेकर झंडी, लालपुर, मूड़ा, बिनौर, हरसिंगारपुर और मिर्जागंज समेत आसपास के गांवों में देर शाम तक जश्ने ईदुल मिलादुन्नबी की रौनक बनी रही। गलियों में लोगों की आवाजाही, बच्चों का उत्साह, घरों में पकवानों की खुशबू और महफिलों में गूंजती नात-ए-पाक ने पूरे क्षेत्र को खुशियों से सराबोर कर दिया। लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हुए पर्व की खुशियां साझा कीं और देश व समाज में हमेशा अमन, मोहब्बत और भाईचारा कायम रहने की दुआ की।