पुस्तक का विमोचन: योगेश्वर कृष्ण का विराट स्वरुप है "विराट श्री कृष्ण चालीसा"
लेखक विजय मिश्र की कृति का प्रोफेसर दिव्या चौधरी एवम सांसद डॉ. एसपी सिंह ने किया विमोचन
लखनऊ। श्रीमदभागवत गीता के ग्यारहवें अध्याय में वर्णित भगवान् श्री कृष्ण के विराट स्वरुप की काव्यात्मक स्तुति को साहित्यकार एवं चिंतक विजय मिश्रा ने कलमबद्ध कर "विराट श्री कृष्ण चालीसा" का रूप प्रदान किया है। निर्जला एकादशी के दिन गुरुवार को गोमती नगर स्थित लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ़ प्रोफेशनल स्टडीज में लेखक की पुस्तक का विमोचन मुख्य अतिथि प्रोफेसर दिव्या चौधरी एवम लोकसभा सांसद डॉ. एसपी सिंह ने किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. सिंह ने लेखक विजय प्रकाश मिश्रा को इस महत्वपूर्ण कृति के लिए बधाई देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व जीवन प्रबंधन, नेतृत्व, कर्तव्य एवं आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक समाज के विभिन्न वर्गों में व्यापक रूप से लोकप्रिय होगी तथा लोगों को जीवन में सकारात्मक प्रेरणा प्रदान करेगी।
मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) दिव्या चौधरी, निदेशक, जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, कानपुर; विशिष्ट अतिथि रूप में प्रसिद्ध मीडिया पर्सनैलिटी स्वाति श्रीवास्तव; प्रो. (डॉ.) अमिता कनौजिया, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, लखनऊ विश्वविद्यालय; प्रो. राजकुमार सिंह, एमिटी विश्वविद्यालय; फिल्म मेकर निवेदिता शुक्ल तिवारी, निदेशिका नेहा सिंह एवम गरिमा सिंह तथा वरिष्ठ पत्रकार रवि गुप्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। स्वागत भाषण डॉ. लक्ष्मी शंकर अवस्थी ने प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने पुस्तक की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डाला।
ये खबर भी पढ़े : डीएम अंजनी कुमार सिंह ने जनता दर्शन की शिकायत पर खुद संभाली कमान,मौके पर पहुंचकर कराया स्थलीय सत्यापन, राजस्व टीम को विस्तृत पैमाइश के निर्देशअपने उद्बोधनों में वक्ताओं ने "विराट श्री कृष्ण चालीसा" को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि यह कृति केवल भक्ति का माध्यम ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का एक प्रभावी प्रयास है। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक के तीव्र विस्तार के इस युग में ऐसी रचनाएँ युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
लेखक विजय प्रकाश मिश्रा ने पुस्तक की रचना-यात्रा, उसके उद्देश्य तथा श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप को जन-जन तक पहुँचाने की अपनी भावना को साझा किया। कार्यक्रम का सफल संचालन गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ तथा अंत में डॉ. संजय प्रताप सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, विद्वानों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
