चेतावनी के बाद भी श्री राम मंदिर ट्रस्ट ने एसओपी नहीं बनाई,प्रबंधन पर उठे सवाल
निजी फर्म में 2020 में इंटरनल ऑडिट किया था
मैनेजमेंट को 'बेहद गैर-पेशेवर' बताया था
लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सुर्खियों में है। एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट बनने के कुछ ही महीनों बाद एक प्राइवेट ऑडिट फर्म ने इसकी मैनेजमेंट को 'बेहद गैर-पेशेवर' (अनप्रोफेशनल) बताया था।
फर्म ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि मंदिर को मिलने वाले चंदे का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड ही नहीं रखा जा रहा है। मैनेजमेंट सुधारने के लिए 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेस' बनाने को भी कहा गया था, लेकिन उस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इसी लापरवाही के चलते अब ट्रस्ट पर चंदे में हेराफेरी के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
इस पूरे मामले में एक स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रस्ट के गठन के बाद 2020 में एक वरिष्ठ सदस्य के कहने पर निजी ऑडिट फर्म ने इंटरनल ऑडिट और रिस्क मैनेजमेंट रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें कहा गया था कि मंदिर परिसर की जिम्मेदारी संभाल रहे ट्रस्ट मैनेजमेंट का ढांचा तय नहीं है।
फाइनेंशियल रिपोर्टिंग के लिए कोई सिस्टमैटिक रिकॉर्ड नहीं है। ट्रांजेक्शन, डेटा मैनेजमेंट और स्टाफ पर कोई प्रभावी नियंत्रण भी नहीं है। गैर-पेशेवर स्टाफ और डेटा मैनेजमेंट से गलत रिपोर्टिंग का खतरा बढ़ सकता है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
