अलीगंज अग्निकांड : निलंबित अफसर के बयान पर बवाल, वीडियो ने मचाया हंड़कप
लखनऊ। लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड की जांच के बीच निलंबित फायर विभाग के अधिकारी कमलेंद्र कुमार यानि केके सिंह ने ऐसा बयान दिया जिसे लेकर वबाल मच गया है। इस भयावह अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर चार अधिकारियों को प्रारंभिक रूप से दोषी मानते हुए निलंबित किया गया था, उनमें फायर विभाग के एफएसएसओ केके सिंह भी शामिल हैं।
निलंबन के दो दिन बाद बुधवार को केके सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें आरोप लगाया कि भीषण अग्निकांड की घटना में उन्हें बली का बकरा बनाया गया है। असल में जो अधिकारी फायर सेफ्टी के लिए जिम्मेदार हैं, जिनके पास प्रशासनिक आदेश देने के आधिकार हैं , उनको बचाने के लिए छोटे अफसरों के निलंबित कर दिया गया है। केके सिंह ने कहा कि उनके उपर की गई कार्रवाई अन्यायपूर्ण है।
खुद को निर्दोष बताते हुए केके सिंह ने कहा कि उनका काम केवल स्थानीय निरीक्षण और उसकी रिपोर्टिंग तक सीमित है। उनके पास फायर क्लीयरेंस देने या बड़े पैमाने पर सुरक्षा मानकों को लागू करने का अधिकार नहीं है। मामले ने तब यू-टर्न लेते हुए थोड़ी ही देर में केके सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये वीडियो उन्हे दिग्भ्रमित करके बनवाया गया। वो अग्निकांड में मारे गये लोगों को लेकर आहत हैं। सवाल है कि के के सिंह किसी के दवाब में हैं, किसने दिग्भ्रमित करके वीडियो बनवाया।
केके सिंह के दो बयानों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला वीडियो सही था तो बाद में सफाई देने की जरूरत क्यों पड़ी? एसआईटी जांच के बीच विरोधाभासी बयान क्या जांच को प्रभावित कर सकते हैं?अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बादसीएम ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए थे।मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है और चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इनमें फायर विभाग के एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह शामिल हैं। इस विरोधाभासी वीडियो सामने आने से जांच के साथ प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नई बहस शुरू है। निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
