इश्क-ए-रसूल की पहचान का नाम आला हजरत है : मेहराब हुसैन
ब्यूरो रिपोर्ट
मलकों वाली एक मीनार मस्जिद में मनाया गया 108 वां उर्स-ए-आला हजरत, कुल शरीफ में दुआ मांगी
शाहजहांपुर। अंजुमन गुलामाने ताजुश्शरिया के तहत सालाना 108 वां उर्स-ए-आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिल-ए-बरेलवी रहमतुल्लाह तआला अलैह अकीदत व एहतराम से मनाया गया। इस दौरान उलेमा ने आला हजरत की तालीमात पर अमल करने और ईमान व अकीदे को बचाने की नसीहत की। रविवार को मोहल्ला एमन जई जलाल नगर स्थित मलको वाली एक मीनार मस्जिद में उर्स की महफिल का आगाज मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद इमरान रजा कादरी ने तिलावत-ए-कुरआन से किया। हाजिरीन से खिताब करते हुए मुख्य वक्ता आलिम-ए-दीन हाफिज मेहराब हुसैन रजवी ने कहा कि इश्क-ए-रसूल की पहचान का नाम आला हजरत है। उन्होंने आगे कहा कि तमाम उलमा ए अहले सुन्नत ने आला हजरत को अपना इमाम और पेशवा माना है। आप एक सच्चे आशिक-ए-रसूल थे। हाफिज इमरान रजा कादरी ने कहा कि आज के इस दौर में अपने ईमान व अकीदे को बचाने के लिए आला हजरत के दामन से वाबस्ता होना जरूरी है। इस दौरान हाफिज रियासतुल्ला, हाफिज मोहम्मद अयान रजा, मोहम्मद नवाज रजा, मोहम्मद हस्सान रजा, गुफरान रजा ने नात व मनकबत पेश की। सलातो सलाम के बाद मुल्क व मिल्लत की खुशी व सलामती की दुआ की गई। महफिल में खलीफा ताजुश्शरिया हाफिज फिरासत उल्ला खां रजवी, मौलाना अमानत उल्ला खां नूरी, हाजी अयूब हसन खां, हाजी उसमान, चमन खां, मुनीर रजा अजहरी, रईस अहमद, शहरान साबरी, दिलशाद हुसैन, मोहम्मद तालिब, मोहम्मद हारून, मेराज शम्सुद्दीन, शरफद्दीन, कैफ रजा, अरबाज रजा, मोहम्मद अली हुसैन आदि मौजूद रहे।
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आफ़वां खान उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जनपद के ब्यूरो प्रमुख हैं। इनकी पत्रकारिता के करीब हर बिन्दुओं पर गहरी पकड़ है।
