दुनिया के दादाओं का उपहास नहीं तो क्या गाऊं

ददरी मेला के कवि सम्मेलन में डा. हरिओम पवार की कविताओं पर गूंजी तालियां

बलिया। आंखें दो सागर बांधे कई हिमालय शीश धरे, मैं धरती के आसों का संत्रास नहीं तो क्या गाऊं, खूनी तालिबानों का इतिहास नहीं तो क्या गाऊं, दुनिया के दादाओं का उपहास नहीं तो क्या गाऊं। ये पंक्तियां देश के ओजस्वी कवि डा. हरिओम पवार ने दिसम्बर की सर्द रात में सुनाई तो लोगों के जेहन में दुनिया में चल रही उथल-पुथल कौंधने लगी।ऐतिहासिक ददरी मेला के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए ओज के प्रख्यात कवि डा. हरिओम पवार मध्यरात्रि के बाद कविता प्रस्तुत करने आए। तब तक विशाल जर्मन हैंगर में मौजूद भीड़ टस से मस नहीं हुई थी। कवि सम्मेलन के संचालक गजेन्द्र सोलंकी ने जैसे ही उन्हें माइक पर बुलाया तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत हुआ।

हरिओम पवार ने 'मुझको ये पूरी दुनिया लाचार दिखाई देती है, चीर हरण के चौसर का दरबार दिखाई देती है...' और 'यूएनओ पर लोगों का विश्वास टूटते देखा है, हथियारों के बल पर देशों को टूटते देखा है। इसके पहले परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, अजगरा के विधायक टी राम व डीएम रवींद्र कुमार ने दीप प्रज्वलित कर कवि सम्मेलन का विधिवत उद्धघाटन किया। इसके बाद अनामिका जैन अम्बर ने वंदना के साथ कवि सम्मेलन को शुरुआत दी। अनामिका अम्बर ने इशारों-इशारों में अयोध्या में बन रहे भगवान राम के मंदिर को लेकर भी पंक्तियां पढ़ी।

उन्होंने जैसे कहा 'मांग रहे थे कल तक जो प्रमाण राम के होने का ....' लोग जय श्रीराम का नारे लगाने लगे। वहीं, जिले के ही युवा कवि हर्ष पाण्डेय ने मंच की पहली कविता पढ़ी। हर्ष ने अपनी कविता ''महबूब के आगे अपनी मां को न भूले यह गरिमा है...' से जमकर तालियां बटोरी। वाराणसी के सौरभ जायसवाल ने लोगों को हास्य-व्यंग्य से खूब हंसाया। इसी बीच जिले की ही प्रतिभा यादव ने श्रोताओं को श्रृंगार रस से सराबोर किया। उन्होंने 'इरादा सरफोशी का दिलों में आम रखा है।' और 'पलकों पे कोई खाब सजा कर तो देखिए...' के जरिये लोगों को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। सुराजमणि तिवारी ने भी हास्य से खूब गुदगुदाया। वहीं, मुकेश जोशी ने अपनी हास्य कविता से राजनीति पर करारा व्यंग्य किया।

सच्चिदानंद पाठक ने भोजपुरी में कविता सुनाई। रात के ठीक बारह बजे गजेन्द्र सोलंकी ने श्रृंगार की कवियत्री पद्मिनी शर्मा को बुलाया। माइक संभालते ही उन्होंने आधी आबादी को समर्पित पंक्तियां 'मेरे काजल का दुश्मन है ये मेरी आँख का पानी...', और ''कलियुग के रावणों से अपनी सीता बचा लो...' सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। ''रावण बचा है न कोई कंस बचा है, अपमान जिसने भी नारियों का किया, जग में ना कोई भी अंश बचा है...'। इसके बाद।मशहूर हास्य कवि शम्भू शिखर ने अपनी चुटीले व्यंगों से लोगों को खूब हंसाया। उन्होंने राजनीति पर व्यंग करती कविता ''चीते ने कहा कि विदेश से ही बीजेपी ज्वाइन कर लिया है...' सुनाई। इसके बाद 'दुल्हन ने फेरे पंडी जी के साथ ले लिए...'' जैसी कविताओं से जमकर वाहवाही बटोरी।

रोडवेज बसों में नामचीन कवियों की कविताओं को लिखवाने की मांग-
मशहूर कवि डा. हरिओम पवार ने न सिर्फ अपनी कविताओं को पढ़ा, बल्कि सामने मौजूद परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से रोडवेज बसों में नामचीन कवियों की कविताओं को लिखवाने की भी सलाह दे डाली। वहीं, पद्मश्री डा. सुनील जोगी ने दिसम्बर की सर्द रात में ठंड के बीच खुले पंडाल में कवि सम्मेलन कराने की बजाय स्थायी ऑडिटोरियम बनवाने की बात कही। ताकि कवियों और श्रोताओं को परेशानी न हो। दोनों मशहूर कवियों की इन मांगों पर दयाशंकर सिंह ने अपनी सहमति जताई।

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