अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट में जालसाजी के मामले में तत्कालीन एसडीएम सहित 10 अधिकारी-कर्मी दोषी

अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट में जालसाजी के मामले में तत्कालीन एसडीएम सहित 10 अधिकारी-कर्मी दोषी

रायपुर। अरपा भैंसाझार परियोजना में भू - अर्जन में अनियामित्ता के मामले में 10 अधिकारी-कर्मी दोषी पाए गए हैं। इनके सबके खिलाफ कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने विधान सभा में बुधवार को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी है।इस संबंध में पूर्व स्पीकर व विधायक धरमलाल कौशिक के सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री ने बुधवार को सदन के सामने जांच रिपोर्ट प्रस्तुत कर दिया। कोटा के तत्कालीन एसडीएम व भूअर्जन अधिकारी आनंदरूप तिवारी सहित राजस्व व जल संसाधन विभाग के 10अधिकारी-कर्मी दोषी पाए गए हैं। जल्द ही इनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है । विधानसभा में बुधवार को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि हम इस अनियमितता के मामले को लेकर लगातार सवाल उठा रहे थे, उसका आज अंतिम जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत हो गया है और दोषियों का पर्दाफाश हो चुका है। अब जिनके साथ अन्याय हो रहा है, उन्हें अब न्याय मिलेगा।

विधायक कौशिक ने कहा कि अरपा भैंसाझार परियोजना में भारी अनियमितता पायी गई है। इस बात को राजस्व मंत्री द्वारा स्वीकार भी किया गया है। जिनका जमीन अधिग्रहण किया गया है ,उसमें नहर का निर्माण नहीं हुआ है और जिनके जमीनों का अधिग्रहण नहीं किया गया ,उनके जमीन में नहरों का निर्माण हुआ है। प्रश्नकाल में भाजपा के विधायक धरम लाल कौशिक के सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री ने बताया कि अरपा भैंसाझार परियोजना में भू-अर्जन और अन्य अनियमितताओं की जांच के लिए कलेक्टर के आदेश पर छः सदस्यों की समिति का गठन किया गया था।समिति में तत्कालीन अतिरिक्त कलेक्टर बी एस उइके,ई ई आरपी शुक्ला, एसडीएम देवेन्द्र पटेल ,डिप्टी कलेक्टर अजीत पुजारी और प्रभारी तहसीलदार पेखन टुंडे सदस्य थे।समिति द्वारा प्रारम्भिक जांच प्रतिवेदन 24 जुलाई 2021 को प्रस्तुत किया गया था ।उन्होंने बताया कि समिति में शामिल कुछ अधिकारी-कर्मचारी के तबादले होने से फिर से जांच समिति बनाई गई।जांच समिति द्वारा अंतिम प्रतिवेदन 23 फरवरी 2023 को प्रस्तुत किया गया ।अरपा भैंसाझार निर्माण में कुल 10 खसरे, कुल रकबा 3. 42 एकड़ नहर निर्माण में प्रभावित नहीं होना पाया गया।जो की पूर्व में अवार्ड पारित करते हुए हुए 10 करोड़ 68 लाख 44 हजार से अधिक भुगतान किया गया। जिसे संबन्धितों से वसूली किया गया जाना प्रस्तावित है। यह भी बताया कि कुल आठ खसरे में प्रभावित रकबे में आंशिक त्रुटि पाई गई है। जांच में दोषी पाए गए अधिकारी व कर्मचारियों की सूची भी पेश की गई है। सूची सौंपने के साथ ही कमेटी ने कार्रवाई की अनुशंसा भी की है।

जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि 10 खसरा नंबर की 3.42 एकड़ जमीन का फर्जी तरीके से अधिग्रहण किया गया है। इसके एवज में भूमि स्वामियों को 10 करोड़ 68 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। यह ऐसी जमीन है जहां पर नहर का निर्माण ही नहीं किया गया है। ऐसा कर अफसरों ने बड़ी गड़बड़ी की है और भूमि स्वामियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की है। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने बताया कि अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट में आरएस नायडू एवं अशोक कुमार तिवारी- तत्कालीन कार्यपालन अभियंता जल संसाधन संभाग कोटा, आरके राजपूत- उप अभियंता, जल संसाधन विभाग, आरपी द्विवेदी-तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी, जल संसाधन अनुभाग तखतपुर, आर के साय-तत्कालीन अतिरिक्त तहसीलदार सकरी,आंनदरूप् तिवारी तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी, कीर्ति सिंंह राठौर - तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी एवं भू अर्जन अधिकारी कोटा ,फूल सिंह राजस्व निरीक्षक ,दिलशाद अहमद तथा मुकेश कुमार साहू तत्कालिन पटवारी ,सकरी दोषी पाए गए हैं ।


 

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