सस्ते कॉलिंग-SMS प्लान की उम्मीदें टूटीं, Jio, Airtel और Vi ने कहा- नहीं कर सकते
नई दिल्ली। रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया (Vi) ने ग्राहकों के लिए सस्ते, सिर्फ वॉइस और SMS वाले प्लान लाने के ट्राई के प्रस्ताव को मानने से मना कर दिया है। दरअसल, दूरसंचार नियामक TRAI ने Jio, Airtel और वोडाफोन आइडिया (Vi) को एक प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव में कंपनियों से कहा गया था कि वे ग्राहकों के लिए ऐसे सस्ते प्लान लेकर आएं, जिनमें सिर्फ कॉलिंग और मैसेज की सुविधा हो और इंटरनेट ना हो। लेकिन, इन तीनों बड़ी टेलीकॉम कंपनियों ने रेगुलेटर के इस प्रस्ताव को मानने से साफ इनकार कर दिया है। यानी कंपनियां ऐसा कोई प्लान नहीं लाना चाहतीं। उनका कहना है कि इससे साइबर क्राइम बढ़ेंगे।
टैरिफ प्लान में नहीं करेंगे कोई बदलाव- टेलीकॉम कंपनियां
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) चाहता था कि मोबाइल कंपनियां ग्राहकों के लिए कुछ ऐसे नए और सस्ते प्लान लेकर आएं, जिनकी वैलिडिटी भले ही कम हो, लेकिन उनमें सिर्फ कॉलिंग और मैसेज की सुविधा मिले।
लेकिन, ET Telecom की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने ट्राई से कहा है कि वे टैरिफ प्लान में कोई बदलाव नहीं करना चाहतीं। कंपनियों का कहना है कि जो प्लान जैसे चल रहे हैं, उन्हें वैसा ही रहने दिया जाए और ऐसा कोई नया प्लान अनिवार्य ना किया जाए।
डेटा वाले प्लान लेने की मजबूरी
कंज्यूमर राइट्स के लिए काम करने वालों का कहना है कि कम आय वाले, ग्रामीण और बुजुर्ग यूजर्स को मोबाइल डेटा वाले पैक खरीदने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन कंपनियां ऐसे कोई प्लान ऑफर नहीं करती, जिनमें सिर्फ कॉलिंग और एसएमएस हों। इस कारण लोगों को मजबूर होकर डेटा वाले प्लान लेने पड़ते हैं। भले ही वे उनका इस्तेमाल ना करते हों।
बिना जरूरत हर साल खर्च हो रहे 15,000-20,000 करोड़ रुपये
कंज्यूमर एडवोकेसी ग्रुप्स और गैर-सरकारी संगठनों ने टेलीकॉम ऑपरेटरों के उन दावों को चुनौती दी है, जो ग्राहकों के खिलाफ हैं।
उनका कहना है कि अनुमान के मुताबिक 30-35 करोड़ फीचर फोन का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स हैं, जिनमें से लगभग 10-15 करोड़ लोग डेटा सर्विस का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
गुजरात के हिम्मतनगर स्थित कंज्यूमर प्रोटेक्शन एसोसिएशन का कहना है कि उन्हें सही ऑप्शन नहीं मिल रहे हैं और वे जरूरत नहीं होने पर भी मोबाइल डेटा के लिए पैसे देने पर मजबूर हैं।
इस कारण वे हर साल लगभग 15,000-20,000 करोड़ रुपये बिना जरूरत के खर्च कर रहे हैं।
ऐसा संभव नहीं- जियो ने बताया कारण
15 जून, 2026 को TRAI ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन रेगुलेशंस में एक बदलाव के लिए ओपन-हाउस डिस्कशन का आयोजन किया था। इस बदलाव के तहत सिर्फ वॉइस और SMS वाले पैक ऑफर करना का प्रस्ताव है। रिलायंस जियो के एक अधिकारी ने कहा कि यह प्रस्तावित बदलाव तकनीकी रूप से संभव नहीं है, क्योंकि आज के 4G और 5G नेटवर्क पूरी तरह से इंटरनेट प्रोटोकॉल पर बेस्ड हैं। इसका मतलब है कि वॉइस सिर्फ एक एप्लीकेशन है, जो डेटा नेटवर्क पर चलती है और इन दोनों को अलग करना मुमकिन नहीं है।
बढ़ेंगे साइबर क्राइम- जियो
जियो ने सरकार को चेतावनी देते कहा है कि अगर सिर्फ कॉलिंग और मैसेज वाले सस्ते और कम दिनों के प्लान अनिवार्य किए गए, तो इससे ऑनलाइन ठगी और फ्रॉड करने वाले अपराधियों का काम बहुत आसान हो जाएगा।
कंपनी का मानना है कि इतने सस्ते प्लान मिलने से धोखेबाज लोग आसानी से कई सिम खरीद लेंगे। इसके बाद वे लोगों को फालतू के विज्ञापन वाले मैसेज, फर्जी कॉल और धोखाधड़ी वाले लिंक भेजकर उन्हें अपनी ठगी का शिकार बनाएंगे, जिससे देश में साइबर क्राइम के मामले बहुत तेजी से बढ़ जाएंगे।
जियो, एयरेटल और Vi ने बताई वजह
Jio ने यह भी कहा कि उसके एंट्री-लेवल यूजर्स में से 88% लोग एक्टिव रूप से डेटा का इस्तेमाल करते हैं और सिर्फ वॉइस वाले मौजूदा प्लान्स को बहुत कम लोग लेते हैं।
Vodafone Idea ने कहा कि डेटा को ना देने से बिल का अचानक ज्यादा आना (बिल शॉक) जैसी समस्या हो सकती है, क्योंकि ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर अपडेट और OTP वेरिफिकेशन के लिए बैकग्राउंड में होने वाले डेटा इस्तेमाल की वजह से ग्राहकों को 'पे-एज-यू-गो' रेट पर चार्ज किया जा सकता है, जिससे बिल अचानक बढ़ सकता है।
Bharti Airtel ने कहा कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर साफ तौर पर 'मोबाइल-फर्स्ट' है और इससे ऐसे लोगों का एक ग्रुप बन सकता है जो डेटा के इस्तेमाल से पूरी तरह बाहर रह जाए।
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