चीन में पवन ऊर्जा से चलने वाला अंडरवॉटर डेटा सेंटर, 3 बड़ी समस्याओ से निजात?
नई दिल्ली। चीन ने दुनिया का पहला पवन ऊर्जा से चलने वाला अंडरवॉटर डेटा सेंटर लॉन्च किया है। यह समुद्र के अंदर मौजूद है। डेटा सेंटरों में पानी और बिजली बहुत अधिक खर्च होती है। ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए चीन अपने डेटा सेंटरों को समुद्र के अंदर ले जा रहा है। खास बात है कि यह आइडिया उसे अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के ‘प्रोजेक्ट नेटिक’ से मिला है। यह डेटा सेंटर चीन के शंघाई के लिन-गांग स्पेशल एरिया में लगभग 32 फीट नीचे समुद्र में स्थित है। इसके चारों ओर 50 से अधिक पवन चक्कियां लगी हैं। डेटा सेंटर की बदौलत चीन को 3 बड़ी समस्याओं के सुलझाने की उम्मीद है।
किन 3 समस्याओं को सुलझाएगा डेटा सेंटर?
Bgr की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी इंजीनियरों को उम्मीद है कि लगभग 1900 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट वाला यह डेटा सेंटर तीन बड़ी समस्याओं- बिजली, कूलिंग (ठंडा रखना) और जमीन की कमी को हल कर देगा। यह अपनी बिजली पवन ऊर्जा से बनाएगा। समुद्र के नीचे होने से इसे नैचुरल कूलिंग मिलेगी और डेटा सेंटरों के लिए उपयोग होने वाली जमीन की कमी भी हल हो जाएगी। (REF. )
अंडरवॉटर डेटा सेंटर की खास बातें
रिपोर्ट के अनुसार, इस डेटा सेंटर में 2 हजार सर्वर हैं जो इसे मीडियम साइज का डेटा सेंटर बनाते हैं।
पूरी क्षमता से चलने पर यह डेटा सेंटर 24 मेगावाट बिजली पर काम करेगा।
पूरे साल काम करने पर यह डेटा सेंटर अमेरिका के 20 हजार घरों की जितनी खर्च करेगा।
क्योंकि यह समुद्र के अंदर है और पवन ऊर्जा से चलेगा इसलिए आम लोगों को बिजली किल्लत से नहीं जूझना होगा।
समुद्र के अंदर डेटा सेंटर बनाने के फायदे
समुद्र के अंदर डेटा सेंटर बनाने के फायदे कई हैं। क्योंकि यह समुद्र के अंदर है इसलिए पीने के पानी की बर्बादी नहीं होगी। डेटा सेंटरों को ठंडा रखने में काफी बिजली खर्च होती है। यह डेटा सेंटर समुद्र के नीचे होने के कारण प्राकृतिक रूप से ठंडा रहेगा। इसे बनाने वाली कंपनी HiCloud ने एक और नए डेटा सेंटर को समुद्र में लगाने की तैयारी की है।
पवन ऊर्जा का उपयोग पहली बार
दुनिया में पहली बार ऐसा हो रहा है जब समुद्र के नीचे मौजूद किसी डेटा सेंटर को चलाने के लिए पवन ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा। कंपनी का दावा है कि यह डेटा सेंटर 26 हजार टन पानी बचता है। हालांकि एक चिंता इस डेटा सेंटर के कारण समुद्री जीवों पर पड़ने वाले असर की है।
जलीय जीवों को खतरा:
रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर जब समुद्री पानी को वापस छोड़ता है तो डेटा सेंटर की गर्मी भी पानी में घुलती है। इससे जलीय जीवों को खतरा हो सकता है। डेटा सेंटर से चिंंता: हालांकि कंपनी यह दावा करती है कि इस डेटा सेंटर के कारण आसपास के पानी का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस से भी कम बढ़ा है। मछलियों ने बनाया घर: दावा है कि मछलियां इस डेटा सेंटर के मॉड्यूल्स के पास जमा हो रही हैं। वह तेज समुद्री लहरों से बचने के लिए इसे घर बना रही हैं।
माइक्रोसॉफ्ट से कैसे मिली प्रेरणा
रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने साल 2018 में स्कॉटलैंड के तट पर 'प्रोजेक्ट नैटिक' (Project Natick) लॉन्च किया था। कंपनी ने बिना इंसानी दखल के दो साल से अधिक समय तक 855 सर्वर पानी के नीचे चलाए। इस दौरान पानी के नीचे 6 सर्वर खराब हुए, जबकि जमीन पर चल रहे सर्वरों में से 8 खराब हो गए थे। तब पानी के अंदर सर्वरों को चलाना ज्यादा सही माना गया। कहा जाता है कि HiCloud ने माइक्रोसॉफ्ट के आइडिया पर काम किया। वैसे समुद्र में डेटा सेंटर लगाने की एक चुनौती यह है कि खारे पानी के कारण सामान में जंग तेजी से लग सकती है। हार्डवेयर की मरम्मत करने में भी परेशानियां आएंगी। अनुमान है कि ऐसे डेटा सेंटर 25 साल तक काम करेंगे।
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