ऐसे मिलेंगी मरीजों को सस्ती दवाएं?

देहरादून। सरकार ने अस्पताल के भीतर जन औषधि केंद्र इसलिए खोले थे ताकि बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके परेशान तीमारदार को अस्पतालों में फ्री न मिलने वाली दवाएं, सस्ती दर पर मिल सकें। लेकिन कमाई के चक्कर में स्टोर संचालक मरीजों को जेनेरिक की बजाए महंगी ब्रांडेड दवाई दे रहे हैं।

देहरादून: राजधानी में जिला अस्पताल के तहत आने वाले गांधी अस्पताल के जन औषधि केंद्र पर लगातार ब्रांडेड दवा बिकने की शिकायत मिल रही हैं। चिकित्सा अधीक्षक को यह शिकायत मिलने के बाद स्टोर संचालक को नोटिस दिया गया। कोरोनेशन अस्पताल के जन औषधि केंद्र को भी नोटिस भेजा गया है। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ.शिखा जंगपांगी ने बताया कि कोरोनेशन एवं गांधी दोनों अस्पतालों में जन औषधि केंद्रों को नोटिस भेजकर सिर्फ जेनेरिक दवाएं बेचने को कहा गया है। महंगी दवाई रखने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

ऋषिकेश: ऋषिकेश सरकारी अस्पताल के जन औषधि केंद्र पर भी ब्रांडेड दवाई बिक रही है। गुरुवार को अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टर को दिखाने के बाद जन औषधि केंद्र से दवाई मांगी गई तो स्टोर से ब्रांडेड दवाई दी गई। अस्पताल के सीएमएस डा. आरएस राणा ने बताया कि जन औषधि संचालक को केवल जन औषधि की दवाएं बेचने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल के जन औषधि केंद्र में ब्रांडेड दवाई मिली तो कार्रवाई की जाएगी।

अल्मोड़ा: यहां के जिला अस्पताल में खुले जन औषधि केंद्र में भी ब्रांडेड दवाएं बिक रहीं है। पड़ताल के दौरान गुरुवार को हिन्दुस्तान टीम ओपीडी का पर्चा बनवाकर औषधि केंद्र पहुंची। यहां से डीएसआर दवा का पत्ता लिया। इसके अलावा दवा केंद्र पर खांसी का टॉनिक व एक और दवा खरीदी। ये दोनों दवाएं भी ब्रांडेड थीं। इनमें एक दवा पर 145 रुपये एमआरपी प्रिंट था। केंद्र संचालक ने 135 रुपये लिए।

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उत्तरकाशी: जिला अस्पताल के जन औषधि केंद्र पर कुछ दिन पूर्व ही औषधि विभाग ने छापा मारकर बड़ी मात्रा में ब्रांडेड दवाएं पकड़ी थीं। कार्रवाई की बात भी कही गई थी पर हुआ कुछ नहीं। गुरुवार को कई मरीजों ने शिकायत की कि जन औषधि केंद्र पर ब्रांडेड दवाई बिकती हैं।

श्रीनगर: श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पताल में सचांलित हो रहे जन औषधि केंद्र में भी बड़े स्तर पर ब्रांडेड दवाई बिकने की शिकायत है। कैमिस्ट एंड ड्रग्स एसोसिएशन श्रीनगर के अध्यक्ष नरेश नौटियाल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के जन औषधि केंद्र से जेनेरिक के अलावा अन्य दवाइयां भी बेची जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन की ओर से इस संदर्भ में ड्रग इंस्पेक्टर को शिकायत की गई है। हालांकि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

40 से पचास प्रतिशत तक सस्ती होती हैं जेनेरिक दवाएं
राज्य के सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र खोलने के पीछे राज्य व केंद्र सरकार का मुख्य मकसद यह था कि मरीजों को सस्ती दवाएं मिल सकें। केंद्र व राज्य सरकार अस्पतालों में वैसे तो निशुल्क दवा उपलब्ध कराती है लेकिन जो दवाएं नहीं मिलती उनके लिए जन औषधि केंद्र खोले जाते हैं। जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 40 से 50% तक सस्ती होती हैं।

इसीलिए सरकार इन दवाओं को प्रमोट करती हैं। लेकिन डॉक्टरों एवं स्टोर संचालकों के गठजोड़ की वजह से कई बार आम लोगों को इसका ठीक से लाभ नहीं मिल पाता। जेनेरिक दवा वह दवा है जो बिना किसी पेटेंट के बनाई और वितरित की जाती है। जेनेरिक दवाएं गुणवत्ता के मामले में किसी भी तरह से ब्रांडेड दवाओं से कम नहीं होती हैं।

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