तहसीलदार का वीआईपी कल्चर: नीली बत्ती का मोह नहीं छोड़ पा रहे ‘नायब साहब’!
सरोजनी नगर तहसील के कुछ अफसरों ने निजी गाड़ियों पर लगा रखा है नीली बत्ती
लखनऊ, सरोजनी नगर। राजधानी मुख्यालय से कुछ किमी दूर स्थित सरोजनी नगर तहसील में तैनात नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी वीआईपी कल्चर का मोह नहीं छोड़ पा रहे। सरकारी छोड़िये जनाब, ये अफसरान साहब लोग तो निजी गाड़ियों में नीली बत्ती लगाकर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं और बकायदा उसी अंदाज में तहसील कार्यालय भी आना जाना होता है।
ऐसे में इससे यह साबित होता है कि जीरो टॉलरेंस नीति इन अधिकारियों के लिए कोई मायने नहीं रखती है या फिर अपनी पावर और पद की हनक दिखाकर यह साबित करना चाहते हैं कि वीआईपी कल्चर अभी खत्म नहीं हुआ है। सरोजनी नगर तहसील में तैनात नायब तहसीलदार ऐश्वर्या नंदन व नायब तहसीलदार अनूप श्रीवास्तव और अन्य नायब तहसीलदारो ने अपनी अपनी निजी गाड़ियों के ऊपर नीली बत्ती लगा रखी है जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए लाल और नीली बत्ती प्राइवेट गाड़ियों में पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा रखा है। लेकिन इसके बावजूद इसके इन अफसरों द्वारा लगातार शासन के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है।
ये खबर भी पढ़े : मौसम की अनिश्चितता और वर्षा के बदलते स्वरूप को लेकर हर परिस्थिति के लिए तैयार रहें अधिकारी : मुख्यमंत्रीवैसे देखा जाये तो राजधानी की सड़कों पर नीली बत्ती लगी ऐसी तमाम निजी गाड़ियां सड़कों पर फर्राटा भर रही हैं जबकि देश व प्रदेश में नीली या लाल बत्ती के वीआईपी कल्चर पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार के नियम पहले से ही निर्धारित हैं।
ऐसे में पूरे तहसील परिसर और क्षेत्र में प्रबुद्ध लोगों के बीच यही चर्चा है कि आखिर लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस व आरटीओ टीम ऐसे मामलों को क्यों नजरअंदाज कर रही और या फिर यह माना जाये कि पॉवर व पोजीशन देखकर देखकर इस पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
क्या बोले लखनऊ आरटीओ प्रवर्तन...!
उपरोक्त प्रकरण पर जब तरूणमित्र संवाददाता टीम ने लखनऊ संभाग के आरटीओ प्रवर्तन प्रभात कुमार पांडेय से बात की तो उनका यही कहना रहा कि नियम तो यही कहता है कि केवल राहत, आपदा व बचाव कार्य में लगे अधिकारी ही इस प्रकार की बत्ती का प्रयोग कर सकते हैं।
और निजी गाड़ियों के लिये यह पूरी तरह से प्रतिबंधित है, अब यह उक्त प्रशासनिक अधिकारीगण रोजाना रूटीन विभागीय कामकाज के तहत कार्यालय आते जाते हैं तो फिर नीली आदि बत्ती का प्रयोग तो अतार्किक ही माना जायेगा, ऐसे में तो जिले में हर विभाग के जनपद स्तर के अधिकारियों का दल इस प्रकार के वीआईपी कल्चर वाले बत्तियों के प्रयोग करने की पहल करने लगेगा और जिससे फिर पूर्व में जो इन बत्तियों के प्रतिबंधित प्रयोग को लेकर केंद्र सरकार की जो गाइडलाइंस है उसका व्यवहारिक अनुपालन होना मुश्किल हो जायेगा।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
