दुखहरण नाथ मंदिर में शिव महापुराण कथा के छठे दिन भक्ति में डूबा परिसर
श्री दुखहरण नाथ मंदिर में गूंजा गणपति बप्पा मोरया का जयघोष
मोहम्मद अय्यूब, उतरौला संवाददाता
- कथा व्यास ने सुनाए गणेश-कार्तिकेय जन्म के भावपूर्ण पौराणिक प्रसंग
उतरौला(बलरामपुर)। शुक्रवार को बाबा श्री दुखहरण नाथ मंदिर सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के षष्ठम दिवस पर पूरा मंदिर परिसर भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की भक्ति में डूबा नजर आया। कथा व्यास ने भगवान कार्तिकेय एवं भगवान गणेश के जन्म से जुड़े पौराणिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु पहुंचे, जिससे मंदिर परिसर में पूरे दिन आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
कथा व्यास ने भगवान कार्तिकेय के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए उनके दिव्य स्वरूप, शौर्य, पराक्रम और देवताओं के लिए उनके महत्व का वर्णन किया। इसके बाद भगवान गणेश के जन्म की कथा ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से भावविभोर कर दिया।
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से भगवान गणेश को उत्पन्न किया और उन्हें अपने द्वार पर पहरा देने का दायित्व सौंपा। माता की आज्ञा का पालन करते हुए गणेश जी ने भगवान शिव को भी भीतर प्रवेश करने से रोक दिया। इसी कारण भगवान शिव और गणेश के बीच संघर्ष हुआ और क्रोधित भगवान शिव ने गणेश जी का मस्तक काट दिया।
कथा व्यास ने बताया कि पुत्र की यह स्थिति देखकर माता पार्वती अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गईं। देवताओं ने भगवान शिव से माता पार्वती को शांत करने तथा गणेश जी को पुनर्जीवन देने का आग्रह किया। इसके बाद भगवान शिव ने गणेश जी को हाथी का मस्तक प्रदान कर उन्हें पुनर्जीवित किया और देवताओं में प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया।
कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को समझाया कि किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा इसी पौराणिक प्रसंग से जुड़ी मानी जाती है। उन्होंने भगवान गणेश के द्वादश नामों के स्मरण की महत्ता भी बताई। सामूहिक रूप से गणेश जी के नामों का स्मरण होने पर कथा पंडाल ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से गूंज उठा।
भगवान गणेश और कार्तिकेय के जन्मोत्सव के प्रसंग पर सोहर तथा मंगल गीत प्रस्तुत किए गए। भक्तिमय गीतों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते नजर आए। सुमित संगीत म्यूजिकल ग्रुप और अखंड म्यूजिकल ग्रुप की गायन मंडली ने भजनों एवं मंगल गीतों की प्रस्तुतियों से कथा के वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर मंदिर समिति के सदस्य नितिन झा के बड़े भाई अंकित झा ने मंदिर समिति के कार्यकर्ताओं, कथा व्यास, यज्ञाचार्यों और मुख्य यजमानों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा के समापन तक मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’, ‘गणपति बप्पा मोरया’ और ‘जय माता पार्वती’ के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश के जन्म, उनके प्रथम पूज्य बनने तथा भगवान कार्तिकेय के दिव्य स्वरूप से जुड़े प्रसंगों को श्रद्धापूर्वक सुना। शिव महापुराण कथा के षष्ठम दिवस का आयोजन धार्मिक आस्था, पौराणिक ज्ञान और भक्ति संगीत के अद्भुत संगम के रूप में श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
