घंटों जाम में फंसा उतरौला, भारी वाहनों और अतिक्रमण से जनता बेहाल
उतरौला प्रशासन मौन, भारी वाहनों की कतार में घंटों फंसी जनता
मोहम्मद अय्यूब
उतरौला( बलरामपुर)। उतरौला नगर में गुरुवार को कई घंटों तक लगे भीषण जाम ने यातायात व्यवस्था की पोल खोल दी। हाटन रोड से लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौराहे तक भारी वाहनों की लंबी कतार लगी रही। इसके चलते छोटी गाड़ियों और दोपहिया वाहनों को निकलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जाम में फंसे लोग घंटों तक परेशान रहे जबकि यातायात व्यवस्था संभालने वाला प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।
उतरौला की मुख्य सड़क पर राजकीय बालिका इंटर कॉलेज सहित कई छोटे-बड़े निजी विद्यालय और अस्पताल स्थित हैं। ऐसे में सुबह और दोपहर के समय विद्यार्थियों तथा मरीजों की आवाजाही अधिक रहती है। गुरुवार को एक ओर सड़क पर लंबा जाम लगा रहा, वहीं दूसरी ओर विद्यालयों की छुट्टी के समय छात्र-छात्राओं को भी जाम के बीच से गुजरने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कस्बे के अंदर भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जा रही है। लोगों के अनुसार भारी वाहनों के लिए बाईपास मार्ग उपलब्ध होने के बावजूद कुछ प्रभावशाली और प्रतिष्ठित लोगों के वाहनों को कस्बे के भीतर से ही गुजारा जाता है। यही स्थिति जाम की समस्या को लगातार बढ़ा रही है।
लोगों ने यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यातायात पुलिस कभी-कभार शाम के समय दोपहिया वाहनों का चालान करने तक सीमित दिखाई देती है, लेकिन मुख्य सड़क पर भारी वाहनों के कारण लगने वाले जाम की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कागजी कार्रवाई और चालान से यातायात व्यवस्था नहीं सुधरेगी बल्कि जाम के वास्तविक कारणों पर कार्रवाई करनी होगी।
अतिक्रमण भी बना जाम की बड़ी वजह
जाम की समस्या के पीछे सड़क किनारे हुए अतिक्रमण को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई दुकानदारों ने दुकानों के आगे करीब पांच से सात फीट तक पटरियों पर कब्जा कर रखा है। इससे सड़क की उपयोगी चौड़ाई लगातार कम होती जा रही है। एक ओर सड़क पर भारी वाहनों का दबाव और दूसरी ओर पटरियों पर अतिक्रमण होने के कारण राहगीरों तथा छोटे वाहनों के लिए जगह और कम बचती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका परिषद और प्रशासन की ओर से कुछ माह पहले अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी लेकिन वह महज औपचारिकता बनकर रह गई। कार्रवाई के बाद भी कई स्थानों पर स्थिति फिर पहले जैसी हो गई है।
लोगों ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भारी वाहनों के लिए बाईपास मार्ग मौजूद है तो उन्हें कस्बे की मुख्य सड़क पर आने की अनुमति क्यों दी जा रही है? यदि अतिक्रमण हटाया गया था तो दोबारा पटरियों पर कब्जा कैसे हो गया? जनता का कहना है कि जब तक भारी वाहनों के प्रवेश अतिक्रमण और यातायात नियंत्रण पर सख्ती से कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उतरौला की जाम की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
अब देखना यह है कि कई घंटों तक जाम में फंसी जनता की परेशानी के बाद प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या फिर उतरौला की यातायात व्यवस्था इसी तरह चलती का नाम गाड़ी और भगवान भरोसे चलती रहेगी।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
