ओबरा-डी एवं अनपरा-ई परियोजनाओं के निर्माण कार्य शुरू न होन पर समित ने जताई चिंता

परियोजनाएं उत्पादन निगम को सौंपने की मांग

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कोयला लिंकेज, वित्तीय बाधाओं और ज्वाइंट वेंचर मॉडल के कारण परियोजनाएं ठप हैं

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री मा० योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि प्रदेश के ऊर्जा हितों को सर्वोपरि रखते हुए ओबरा-डी (2×800 मेगावाट) एवं अनपरा-ई (2×800 मेगावाट) ताप विद्युत परियोजनाओं को एनटीपीसी के साथ प्रस्तावित ज्वाइंट वेंचर व्यवस्था से तत्काल मुक्त कर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपा जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि फरवरी 2023 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान इन दोनों परियोजनाओं के लिए एनटीपीसी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे, किंतु 40 माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है। यह स्थिति प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

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संघर्ष समिति ने कहा कि परियोजनाओं में देरी का मुख्य कारण कोयला लिंकेज का अभाव, वित्तीय स्वीकृतियों में बाधाएं तथा ज्वाइंट वेंचर मॉडल की व्यावहारिक कठिनाइयां हैं। रिपोर्ट के अनुसार अभी तक आवश्यक कोयले का लगभग 50 प्रतिशत ही उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है और वह भी अपेक्षाकृत महंगे स्रोत से, जिससे भविष्य में बिजली उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका है। साथ ही एनटीपीसी की निवेश सीमा, भूमि एवं पुनर्वास संबंधी मुद्दे भी परियोजनाओं को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि इन परियोजनाओं के लिए ज्वाइंट वेंचर का प्रयोग असफल साबित हुआ है।

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संघर्ष समिति ने कहा कि इन तथ्यों से यह स्पष्ट हो गया है कि ओबरा-डी और अनपरा-ई परियोजनाएं एनटीपीसी की प्राथमिकताओं में नहीं हैं। प्रदेश की बढ़ती बिजली आवश्यकता को देखते हुए अब और प्रतीक्षा करना राज्यहित में नहीं होगा।

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संघर्ष समिति ने कहा कि सामान्यतः किसी ताप विद्युत परियोजना का निर्माण पांच वर्षों में पूरा हो जाता है, जबकि यहां 40 माह बाद भी निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है। यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो लागत में लगातार वृद्धि (कॉस्ट ओवररन) होगी और प्रदेश को भविष्य में महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी, जिसका आर्थिक बोझ उपभोक्ताओं तथा राज्य सरकार दोनों पर पड़ेगा।

संघर्ष समिति का मत है कि यदि इन परियोजनाओं का निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम द्वारा कराया जाए तो ओबरा एवं अनपरा में पहले से उपलब्ध आधारभूत संरचना, रेलवे साइडिंग, जल व्यवस्था, ऐश हैंडलिंग प्रणाली तथा अन्य साझा सुविधाओं का उपयोग कर 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक उत्पादन लागत कम की जा सकती है। इससे प्रदेश को सस्ती, विश्वसनीय एवं आत्मनिर्भर बिजली उपलब्ध होगी।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि एक ही परिसर में अलग-अलग स्वामित्व वाली उत्पादन परियोजनाओं के संचालन से भविष्य में कोयला परिवहन, रेलवे साइडिंग, ऐश डिस्पोजल तथा अन्य साझा संसाधनों के उपयोग को लेकर अनावश्यक प्रशासनिक एवं कानूनी विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए इन परियोजनाओं को उत्पादन निगम को सौंपना ही सबसे व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक समाधान है।

संघर्ष समिति ने पुनः मांग की कि प्रदेश के व्यापक आर्थिक एवं ऊर्जा हितों को देखते हुए ओबरा-डी एवं अनपरा-ई परियोजनाओं से संबंधित ज्वाइंट वेंचर व्यवस्था तत्काल समाप्त कर इनका निर्माण एवं संचालन उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपा जाए, ताकि प्रदेश की तेजी से बढ़ती विद्युत मांग की पूर्ति समयबद्ध ढंग से हो सके और उत्तर प्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।

लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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