अग्निकांड हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, न्यूनतम फायर व जीवन-सुरक्षा लागू की मांग
देश के लिए एक सेफ्टी नियम बनाए सरकार
लखनऊ। अलीगंज में स्थित एक कोचिंग संस्थान में आग लगने से 15 बच्चों की मौत के बाद एक बार फिर से सार्वजनिक स्थानों पर फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों को लेकर सवाल उठने लगा है। इसी बीच देश में स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल और दूसरी सार्वजनिक इमारतों में बार-बार लगने वाली आग की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि पूरे देश में ज्यादा जोखिम वाली सार्वजनिक जगहों के लिए एक जैसा 'राष्ट्रीय न्यूनतम फायर और जीवन-सुरक्षा फ्रेमवर्क' बनाया जाए और उसे सख्ती से लागू किया जाए।
यह याचिका वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने दायर की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की है कि सभी सार्वजनिक इमारतों के लिए न्यूनतम फायर और जीवन-सुरक्षा मानक तय किए जाएं। उनका कहना है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम होने की वजह से सुरक्षा के स्तर में काफी अंतर है और नियमों का सही तरीके से पालन भी नहीं हो पाता।
याचिका में कहा गया है कि मौजूदा फायर सेफ्टी कानून राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग हैं। कई जगह नियम अधूरे हैं, जबकि कई जगह उनका सही तरीके से पालन नहीं किया जाता। इसका सीधा असर लोगों की सुरक्षा पर पड़ता है और आग लगने जैसी घटनाओं में जान-माल का नुकसान बढ़ जाता है।
याचिका में मांग की गई है कि एक ऐसा राष्ट्रीय फ्रेमवर्क बनाया जाए, जो पूरे देश में समान रूप से लागू हो। इसके दायरे में स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल, गेस्ट हाउस, मनोरंजन स्थल, कमर्शियल बिल्डिंग और ऐसी सभी जगहों को शामिल किया जाए, जहां बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
