ट्रांसफार्मर खराब होने पर अभियंताओं से वसूली करना गलत: समिति
बिना तकनीकी जांच कार्मिको पर जिम्मेदारी थोपना बंद करे प्रबंधन: संघर्ष समिति
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा क्षतिग्रस्त वितरण ट्रांसफार्मरों की मरम्मत पर होने वाले खर्च की जिम्मेदारी निर्धारित कर अभियंताओं एवं अन्य अधिकारियों से वसूली की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। संघर्ष समिति ने इसे अन्यायपूर्ण, अव्यावहारिक, दमनकारी एवं बिजली व्यवस्था के हितों के प्रतिकूल बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन के ग्रामीण विद्युतीकरण एवं द्वितीय प्रणाली नियोजन संगठन द्वारा 10 अगस्त, 2026 को जारी पत्र में क्षतिग्रस्त वितरण ट्रांसफार्मरों के संबंध में अधिकारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई तथा ट्रांसफार्मर मरम्मत पर हुए खर्च की वसूली की सूचना मांगी गई है। यह आदेश स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में अभियंताओं को आर्थिक रूप से दंडित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ट्रांसफार्मर जलने अथवा क्षतिग्रस्त होने के अनेक तकनीकी कारण होते हैं, जिनमें अत्यधिक लोड, ओवरलोडिंग, लो-वोल्टेज, असंतुलित भार, पुराने एवं कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर तथा नेटवर्क की बढ़ती मांग प्रमुख हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में निजी नलकूपों के बढ़ते भार के कारण ट्रांसफार्मरों पर अत्यधिक लोड पड़ रहा है, जबकि आवश्यकतानुसार ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने का पर्याप्त प्रावधान बिजनेस प्लान में नहीं किया गया है। ऐसी परिस्थितियों में बिना तकनीकी जांच और वास्तविक कारण निर्धारित किए अभियंताओं से मरम्मत खर्च की वसूली करना पूरी तरह अनुचित है।
संघर्ष समिति ने कहा कि लोड का आकलन करना, पर्याप्त क्षमता के ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराना, सिस्टम को सुदृढ़ करना और आवश्यकतानुसार क्षमता वृद्धि करना शीर्ष प्रबंधन की जिम्मेदारी है। यदि पर्याप्त क्षमता उपलब्ध नहीं कराई गई और ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर क्षतिग्रस्त हुआ तो उसकी जिम्मेदारी फील्ड के अभियंताओं पर डालना न तो तकनीकी रूप से उचित है और न ही न्यायसंगत।
उन्होंने कहा कि सेवा नियमों में यदि किसी कर्मचारी अथवा अधिकारी की व्यक्तिगत लापरवाही सिद्ध होती है तो उसके विरुद्ध निर्धारित प्रक्रिया के तहत लघु अथवा वृहद दंड की कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन बिना व्यक्तिगत लापरवाही सिद्ध किए ट्रांसफार्मर की मरम्मत का पूरा खर्च अभियंताओं से वसूलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। संघर्ष समिति ने मांग की कि किसी भी वसूली से पहले स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कर वास्तविक कारण पता किया जाय।
संघर्ष समिति ने कहा कि एक ओर प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या और बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, दूसरी ओर फील्ड में अभियंताओं और तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी है। बिजली कर्मी सीमित संसाधनों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति बनाए रखने, उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान करने और आपात परिस्थितियों में विद्युत व्यवस्था बहाल करने में जुटे हैं। ऐसे समय में उनका मनोबल बढ़ाने के बजाय वेतन से रिकवरी और दंडात्मक कार्रवाई का भय पैदा करना बिजली व्यवस्था के लिए घातक है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि वर्टिकल रीस्ट्रक्चरिंग के नाम पर किए गए अव्यवहारिक प्रयोगों से अनेक स्थानों पर विद्युत व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित हुई है। प्रबंधन को अपनी नीतिगत एवं प्रशासनिक कमियों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय फील्ड अभियंताओं और कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाना बंद करना चाहिए।
संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की कि— ट्रांसफार्मर क्षति के नाम पर अभियंताओं एवं कर्मचारियों से मरम्मत खर्च की वसूली की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए। किसी भी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निर्धारित करने से पहले निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की तत्काल क्षमता वृद्धि की जाए। बढ़ती बिजली मांग और उपभोक्ताओं की संख्या के अनुरूप पर्याप्त मानव संसाधन एवं तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। वर्टिकल रीस्ट्रक्चरिंग से उत्पन्न अव्यवस्थाओं की समीक्षा की जाए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां बंद नहीं की गईं और ट्रांसफार्मर मरम्मत खर्च की वसूली का आदेश वापस नहीं लिया गया तो बिजली कर्मचारी लोकतांत्रिक एवं संघर्षात्मक कार्यक्रमों को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे। “दमन से बिजली कर्मियों की आवाज नहीं दबेगी—निजीकरण और उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष और अधिक मजबूती से जारी रहेगा।”
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
