ऑनलाइन ठगी पर अब बैंक भी होंगे जवाबदेह ,50 हजार तक फ्रॉड पर मिलेगा आधा मुआवजा
डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाने की दिशा में आरबीआई की बड़ी पहल
नीरज अवस्थी
- पांच दिन में शिकायत पर पीड़ितों को मिलेगी आर्थिक मदद
नई दिल्ली। डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते दौर में साइबर ठगी के शिकार होने वाले ग्राहकों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बड़ी राहत का रास्ता खोल दिया है। केंद्रीय बैंक ने छोटे मूल्य के डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड मामलों के लिए नया मुआवजा ढांचा जारी किया है, जिसके तहत पात्र ग्राहकों को 25 हजार रुपये तक का मुआवजा मिल सकेगा। यह व्यवस्था एक जनवरी 2027 से लागू होगी और उसके बाद होने वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन पर प्रभावी रहेगी।
नए नियमों के अनुसार, यदि किसी ग्राहक को डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी में 50 हजार रुपये तक का नुकसान होता है तो उसे उसके शुद्ध नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25 हजार रुपये तक मुआवजा दिया जाएगा। इस योजना का लाभ व्यक्तिगत ग्राहकों और एकल स्वामित्व वाले व्यवसायों को मिलेगा। हालांकि यह सुविधा जीवनकाल में केवल एक बार उपलब्ध होगी।
ये खबर भी पढ़े : पासपोर्ट नहीं है भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण, विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद छिड़ी बहसआरबीआई ने मुआवजा पाने के लिए समयबद्ध शिकायत को सबसे महत्वपूर्ण शर्त बनाया है। किसी भी धोखाधड़ी की जानकारी मिलने के पांच कैलेंडर दिनों के भीतर ग्राहक को अपने बैंक को सूचना देनी होगी। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर भी शिकायत दर्ज करानी होगी। समयसीमा के भीतर शिकायत नहीं करने पर मुआवजे की पात्रता प्रभावित हो सकती है।
केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहक की गलती साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की होगी। यदि बैंक यह साबित नहीं कर पाता कि ग्राहक की लापरवाही के कारण धोखाधड़ी हुई है, तो ग्राहक को नियमानुसार राहत और सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इससे डिजिटल लेन-देन में उपभोक्ताओं का विश्वास और मजबूत होने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राहकों के लिए पहले से लागू ‘जीरो लायबिलिटी’ प्रावधान जारी रहेगा। यदि धोखाधड़ी बैंक की लापरवाही, तकनीकी खामी, सुरक्षा उल्लंघन या आंतरिक गड़बड़ी के कारण हुई है तो ग्राहक पर कोई वित्तीय जिम्मेदारी नहीं डाली जाएगी। इसी प्रकार तीसरे पक्ष से जुड़े अनधिकृत लेन-देन की समय पर सूचना देने पर भी ग्राहक को पूर्ण सुरक्षा मिल सकती है। नए ढांचे के तहत बैंकों की जिम्मेदारियां भी बढ़ा दी गई हैं। सभी बैंकों को ग्राहकों के लिए चौबीसों घंटे उपलब्ध शिकायत और रिपोर्टिंग चैनल स्थापित करने होंगे। कार्ड खोने, संदिग्ध गतिविधि या अनधिकृत लेन-देन की स्थिति में ग्राहक तुरंत सूचना दे सकें, इसके लिए मजबूत व्यवस्था विकसित करनी होगी। इसके अलावा 500 रुपये से अधिक के प्रत्येक इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन पर तत्काल एसएमएस अलर्ट भेजना अनिवार्य किया गया है।
क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहकों को अतिरिक्त राहत देते हुए ‘शैडो रिवर्सल’ व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत शिकायत मिलने के पांच दिनों के भीतर विवादित राशि के बराबर अस्थायी राहत दी जाएगी ताकि जांच पूरी होने तक ग्राहक पर ब्याज या अतिरिक्त शुल्क का बोझ न पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान के तेजी से विस्तार के बीच आरबीआई का यह कदम साइबर ठगी पीड़ितों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगा। साथ ही इससे बैंकों पर साइबर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने का दबाव भी बढ़ेगा। नए ढांचे से डिजिटल बैंकिंग प्रणाली में भरोसा बढ़ने और पीड़ित ग्राहकों को समय पर राहत मिलने की उम्मीद है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
