शांति निर्माण में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और स्थानीय नेतृत्व पर भारत का जोर
महासभा में कहा, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और भरोसेमंद साझेदारी से ही टिकाऊ शांति संभव
संघर्षग्रस्त देशों की संस्थागत क्षमता बढ़ाने पर संसाधन केंद्रित करने की वकालत
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा में आयोजित उच्चस्तरीय बहस में भारत ने स्पष्ट किया कि प्रभावी शांति निर्माण (पीसबिल्डिंग) का आधार राष्ट्रीय स्वामित्व, स्थानीय जरूरतें और भरोसे पर आधारित साझेदारी होनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पी. ने कहा कि पीसबिल्डिंग किसी बाहरी एजेंडे के बजाय संबंधित देशों की मांग और प्राथमिकताओं के अनुरूप होनी चाहिए तथा पारंपरिक डोनर-रिसीपिएंट मॉडल से आगे बढ़ना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के पहले 'पीसबिल्डिंग वीक' और शांति निर्माण संरचना के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि स्थायी शांति तभी संभव है, जब देशों की संस्थागत क्षमता मजबूत हो और संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण में स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता मिले। उन्होंने भरोसे, समानता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित वैश्विक साझेदारी को शांति निर्माण की सफलता का अहम आधार बताया।
हरीश पी. ने कहा कि पीसबिल्डिंग आयोग के 19वें सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुईं। इनमें संयुक्त राष्ट्र की शांति निर्माण संरचना की चौथी समीक्षा, पहली राष्ट्रीय शांति निर्माण रणनीति की प्रस्तुति तथा पीसबिल्डिंग फंड के साथ पहला वार्षिक रणनीतिक संवाद शामिल है।
हालांकि उन्होंने चिंता जताई कि पिछले तीन वर्षों में स्वैच्छिक वित्तीय योगदान में कमी आई है और संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा वित्तीय स्थिति का असर शांति निर्माण गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सीमित संसाधनों का उपयोग संघर्ष प्रभावित देशों में संस्थागत मजबूती और राष्ट्रीय क्षमता विकसित करने पर केंद्रित होना चाहिए, ताकि कम संसाधनों में अधिक प्रभाव हासिल किया जा सके।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडे के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 के 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट आॅफ द ईयर' सम्मान से सम्मानित किया जाना इस दिशा में भारत की सक्रिय भूमिका का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्र निर्माण के अनुभव साझा करते हुए सभी साझेदार देशों के साथ मिलकर स्थायी और समावेशी शांति स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
