आपातकाल की पुनरावृत्ति नहीं होने देंगे, लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष देश की धरोहर: रेखा गुप्ता
नई दिल्ली। दिल्ली भाजपा ने शुक्रवार को एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आपातकाल के दौरान जेल गए 115 लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने की। समारोह में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, लोकतंत्र सेनानी सत्यनारायण जाटिया, सांसद मनोज तिवारी, रामवीर सिंह बिधूड़ी, बांसुरी स्वराज, मंत्री आशीष सूद सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में याद किया जाता है ताकि आने वाली पीढ़ियां आपातकाल जैसे दौर को कभी न भूलें। उन्होंने कहा कि जैसे रावण दहन असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है, वैसे ही यह दिन लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प दिलाता है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जेल में रहते हुए भी अपनी लेखनी से लोकतंत्र की आवाज बने रहे और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को देश हमेशा याद रखेगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस आज संविधान की रक्षा की बात करती है, लेकिन आपातकाल के दौरान उसी ने संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सबसे बड़ा आघात पहुंचाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में लाखों लोगों को प्रताड़ित किया गया, जबरन नसबंदी कराई गई और महिलाओं पर हुए अत्याचारों का उल्लेख तक इतिहास से गायब कर दिया गया। उन्होंने युवाओं से आपातकाल के इतिहास को जानने और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहने का आह्वान किया।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि संविधान हत्या दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को यह बताने का भी माध्यम है कि सत्ता के अहंकार में लोकतंत्र और संविधान का किस तरह गला घोंटा गया था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र प्रेस, सक्रिय नागरिक समाज और जागरूक जनता ही लोकतंत्र के सबसे मजबूत स्तंभ हैं।
ये खबर भी पढ़े : वेनेजुएला में दो बड़े भूकंप से तबाही, 10,000 मौतों की आशंका, कई घायल, राहत-बचाव अभियान जारीलोकतंत्र सेनानी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जाटिया ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय था, जब सत्ता बचाने के लिए संविधान की मर्यादाओं को कुचला गया, हजारों लोगों को जेलों में डाला गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पहरा लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल संविधान से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से होती है।
कार्यक्रम के दौरान ओ.पी. बब्बर, नंदकिशोर गर्ग, लाल बिहारी तिवारी, पी.के. चांदला, सुरेश गुप्ता, रामभज, करण सिंह तंवर, श्रवण कुमार, तिलकराज कटारिया, संजय भाटिया, राजन ढींगरा और जगमल प्रसाद सहित 115 लोकतंत्र सेनानियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
