पासपोर्ट नहीं है भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण, विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद छिड़ी बहस

Published By Shishir Patel
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नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय के एक स्पष्टीकरण के बाद देश में नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेजों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित एक ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम या अचूक प्रमाण नहीं माना जा सकता। मंत्रालय के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई और कई लोगों ने सवाल उठाए कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है तो भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन-से दस्तावेज मान्य हैं।

विदेश मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा की अनुमति देना और विदेशों में उसकी पहचान तथा राष्ट्रीयता स्थापित करना है। मंत्रालय ने बताया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 के तहत केंद्र सरकार विशेष परिस्थितियों में सार्वजनिक हित को देखते हुए किसी गैर-नागरिक को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है। इसी कारण पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम और निर्विवाद प्रमाण नहीं माना जाता।

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मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत किया जाता है, जबकि पासपोर्ट अलग कानून यानी पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के अंतर्गत जारी किए जाते हैं। इसलिए नागरिकता और पासपोर्ट से जुड़े कानूनी प्रावधान अलग-अलग हैं।

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विशेषज्ञों के अनुसार भारत में ऐसा कोई एक दस्तावेज नहीं है जिसे हर परिस्थिति में नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जा सके। नागरिकता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति ने नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण या किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त की है।

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जन्म से भारतीय नागरिकों के लिए जन्म प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग समयावधियों में लागू कानूनों के अनुसार माता-पिता की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज भी आवश्यक हो सकते हैं। वहीं विदेशी मूल के वे लोग जिन्होंने कानूनी प्रक्रिया के जरिए भारतीय नागरिकता प्राप्त की है, उनके लिए गृह मंत्रालय द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र या प्राकृतिककरण प्रमाणपत्र सबसे मजबूत प्रमाण माने जाते हैं।

विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड जैसे दस्तावेज नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं। आधार केवल पहचान और निवास का प्रमाण है, जबकि पैन कार्ड कर संबंधी पहचान के लिए जारी किया जाता है। वोटर आईडी मतदान से जुड़ा दस्तावेज है, लेकिन इसे भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।

अदालतें भी कई मामलों में स्पष्ट कर चुकी हैं कि नागरिकता का निर्धारण केवल किसी एक दस्तावेज के आधार पर नहीं किया जा सकता। नागरिकता से जुड़े विवादों में जन्म प्रमाण पत्र, पारिवारिक रिकॉर्ड, भूमि अभिलेख, पुराने शैक्षणिक दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों को भी देखा जाता है।

सरकार ने पहले भी संसद में स्पष्ट किया था कि आधार, पासपोर्ट, वोटर आईडी और पैन कार्ड में से किसी एक को भी भारतीय नागरिकता का पूर्ण और अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता। किसी व्यक्ति की नागरिकता का कानूनी निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों और उससे जुड़े दस्तावेजों के आधार पर ही किया जाता है।

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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।

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