पहले शादी का झांसा देकर किया बलात्कार,गर्भवती होने पर उचौलिया स्थित एच.आर मेमोरियल अस्पताल में जबरन कराया गर्भपात

Published By Vijay Pal Singh
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अनुराग सिंह गौर

पसगवां-खीरी,27 जून(तरुणमित्र)। क्षेत्र के प्राइवेट अस्पतालों की कार्यशैली पर आए दिन सवाल उठते ही रहते है। इन अस्पतालों में मानकों को दरकिनार करके चिकित्सीय कार्य तो किए ही जाते है साथ ही साथ इन अस्पतालों में गर्भपात जैसे गैकानूनी काले कारनामों को अंजाम देने जैसे घिनौने कार्य आम बात हो गई है। अस्पतालों में अवैध गर्भपात करवाना बच्चा गिरवाना अथवा सफाई करवाना कम समय में अधिक मुनाफे का धंधा बन गया है। इसके लिए अस्पताल अथवा क्लीनिक वाले चिकित्सीय नियमावली की वैध कानूनी प्रक्रिया बिना अपनाए अथवा पुलिस को सूचना दिए बिना धड़ाधड़ इस प्रकार के गैर कानूनी कार्य किए जा रहे है। इसी क्रम में मामला है उचौलिया थानान्तर्गत एक गांव का है जिसमें पीड़िता और उसकी मां ने बताया कि उसके ही गांव के एक व्यक्ति के द्वारा एक नाबालिक लड़की के साथ शादी का झांसा देकर जबरन शारीरिक संबंध बनाए शारीरिक संबंध बनाने के बाद उक्त लड़की जब गर्भवती हुई तो उसको एच.आर मेमोरियल अस्पताल उचौलिया लाकर उसके मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर संदीप गौतम जो कि चिकित्सक न होकर फार्मेसी में डॉक्टरेट उपाधि धारी के यहां गर्भपात करवाया गया।

गर्भपात करवाने के समय न तो उसके परिजनों को सूचना दी गई और न ही गर्भपात करवाने के लिए उसकी स्वयं की सहमति अथवा परिजनों की ही सहमति ली गई। पीड़िता ने संवाददाता को बताया कि उक्त मामला 10 मई 2026 का है मेरे ऊपर पुलिस में शिकायत न करने का काफी दवाब बनाया गया परन्तु काफी चक्कर काटने और मशक्कत करने के बाद उचौलिया थाने में 10 जून 2026 को मुकदमा दर्ज हुआ है तथा बलात्कारी की गिरफ्तारी भी हो गई है। परन्तु सवाल यह उठता है कि बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए तथा कोर्ट की बिना अनुमति लिए अथवा पुलिस को सूचना दिए बिना गैर कानूनी रूप से गर्भपात करवाने वाले अस्पताल पर कार्यवाही न होना कही न कही पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहे है। सवाल यह भी उठता है कि क्या इस प्रकार के प्राइवेट अस्पताल गर्भपात कराने अथवा भ्रूण हत्या कर मोटी कमाई करने के लिए खुले हुए है ????

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विदित हो कि पूर्व में यही अस्पताल जो कि यशोदा देवी मेमोरियल अस्पताल से चल रहा था 04-10-2024 को गैर कानूनी रूप से चलते पाए जाने पर मौजूदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी पसगवां डॉक्टर अश्वनी वर्मा एवं नोडल अधिकारी द्वारा सील किया गया था।

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इस संबंध में जब संवाददाता ने एच.आर मेमोरियल अस्पताल उचौलिया के डायरेक्टर डॉक्टर संदीप गौतम से जानकारी ली तो उन्होंने बड़ी हास्यास्पद और चौंकाने वाली बात बताई उन्होंने बताया कि जब लड़की उनके अस्पताल आई तो बच्चा आधा शरीर के अंदर था और आधा निकला हुआ उसके अंतः वस्त्रों में था उसको डॉक्टर प्रियंका सरोज के द्वारा निकाला गया। जब उनसे पूछा गया कि उक्त प्रक्रिया अपनाने से पूर्व क्या कोर्ट की अनुमति या आपने अस्पताल से  चंद कदमों की दूरी पर स्थित उचौलिया थाने में सूचना दी तो उन्होंने इंकार करते हुए कोर्ट की अनुमति अथवा पुलिस को सूचना न देने की बात कही। गर्भ की स्थित के विषय में जब जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि जिसका गर्भपात कराया गया वह लगभग साढ़े सात माह का गर्भ था। जब उनसे अस्पताल संस्थापक डॉक्टर श्रेयांशी जो मूलतः गोरखपुर की निवासी है तथा जिनके नाम पर अस्पताल का पंजीकरण है गर्भपात कराए जाने के समय क्या उपस्थित थी तो उन्होंने बताया कि वो उस दिन नहीं थी वो अवकाश पर थी। जब उनसे संवाददाता ने पूछा कि वो अस्पताल में रहती है तो उन्होंने बताया कि वो आती जाती रहती है। जबकि चिकित्सा नियमों के मुताबिक जिस व्यक्ति के नाम अस्पताल का पंजीकरण होता है उस डॉक्टर के अस्पताल में उपस्थित बिना कोई भी चिकित्सकीय कार्य संपादित नहीं हो सकता।

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कानून क्या कहता है:- कानून के मुताबिक यदि बलात्कार पीड़िता बलात्कार होने के बाद गर्भवती होती है तो उसकी या उसके परिवार की सहमति तथा कोर्ट की अनुमति से ही किसी सरकारी एम.टी.पी सेंटर पर ही गर्भपात कराया जा सकता है। किसी भी प्राइवेट अस्पताल में किसी भी स्थित में गर्भपात नहीं कराया जा सकता। कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत पुलिस को सूचना देने के साथ साथ गर्भपात कराने के लिए कोर्ट की अनुमति आवश्यक है। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट (MTP Act) के अंतर्गत 12 सप्ताह तक एक स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर 12 से 20 सप्ताह तक 2 स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की देखरेख में होगा इसके अतिरिक्त एमटीपी संशोधन अधिनियम 2021 के अनुसार कुछ विशेष श्रेणियों के लोगो जैसे नाबालिग, बलात्कार पीड़ित या विकलांग महिला के 24 सप्ताह तक ही सरकारी एम.टी.पी सेंटर पर गर्भपात कराया जा सकता है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी खीरी डॉक्टर संतोष गुप्ता ने इस संबंध में बताया कि नाबालिग बलात्कार पीड़िता या किसी अन्य महिला का गर्भपात कोर्ट की अनुमति से ही सरकारी एमटीपी सेंटर में कराया जा सकता है। यदि गर्भ 12 सप्ताह तक है तो एक स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और यदि 12 सप्ताह से अधिक 20 सप्ताह तक है तो 2 स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की जांच के उपरांत उनकी देखरेख में किसी सरकारी एम.टी.पी सेंटर पर ही गर्भपात कराया जा सकता है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी पसगवां डॉक्टर अश्वनी वर्मा ने भी मुख्यचिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संतोष वर्मा के कथन की पुनरावृत्ति की और बताया कि किसी भी स्थित में बलात्कार पीड़िता का गर्भपात किसी भी स्थित में प्राइवेट अस्पताल में न होकर सरकारी एमटीपी सेंटर पर 12 सप्ताह तक एक स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर 12 से 20 सप्ताह तक 2 स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की देखरेख में कराया जा सकता है। उससे अधिक समय का गर्भपात किसी भी स्थित में नहीं कराया जा सकता। सभी स्थितियों में माननीय न्यायालय की अनुमति से ही गर्भपात कराना संभव होगा।

अब सवाल यह उठता कि 10 जून 2026 को उचौलिया थाने में बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज होने के साथ आरोपी को जेल भेज देने के बाद पुलिस एफ.आई.आर में एच.आर मेमोरियल अस्पताल उचौलिया में गर्भपात कराए जाने की बात का उल्लेख होने के बाद भी  पुलिस और स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुलिस को सूचना दिए बिना तथा बिना कोर्ट की अनुमति लिए बगैर गर्भपात करने जैसे कार्य को क्यों अंजाम दिया गया। जबकि MTP एक्ट (मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रैग्नेंसी एक्ट) के अंतर्गत यह कार्य केवल सरकार द्वारा स्थापित सरकारी केंद्र पर होना चाहिए  था के बावजूद नियमों का उल्लंघन करके गैर कानूनी रूप से किया गया।

इसके बावजूद गर्भपात कराने जैसे घृणित कार्य करने को लेकर अब तक अस्पताल पर कोई कार्यवाई न होना पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की निष्पक्ष कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। 

क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम,2010 के अंतर्गत जिस एमबीबीएस/एमडी/एमएस डॉक्टर जिसके नाम पर अस्पताल पंजीकृत है उस डॉक्टर को अस्पताल संचालित होने के समय उपस्थित रहना अनिवार्य होता है तो डॉक्टर श्रेयांशी जिनके नाम एच आर मेमोरियल अस्पताल उचौलिया पंजीकृत है जब वो अस्पताल में उस दिन अनुपस्थित थी अथवा अवकाश पर थी तो अस्पताल बंद क्यों नहीं था?? क्यों अस्पताल की चिकित्सीय सेवाएं जारी रही ??गर्भपात कराने जैसा कार्य किसकी अनुमति से किसके द्वारा संपादित किया गया जैसे गंभीर विषय पर अब तक पुलिस अथवा स्वास्थ्य विभाग के द्वारा उदासीनता बरतना उनकी कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है????

सबसे गंभीर बात तो यह है कि इतने दिन बीतने के बाद भी उचौलिया पुलिस के द्वारा गिराए गए गर्भ जो कि पीड़िता के मुताबिक दफन करवा दिया गया था को निकलवाकर पोस्टमार्टम तथा चिकित्सीय परीक्षण के लिए क्यों नहीं भेजा गया???? उक्त सारे प्रश्नों के जवाब न तो स्वास्थ्य महकमे के पास है और न ही पुलिस महकमे के पास है।

खबर के प्रकाशन के बाद अब देखना है कि गहरी नींद में सोया स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग प्रकरण का संज्ञान गर्भपात अथवा भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध के इस गंभीर प्रकरण का संज्ञान लेकर कार्यवाही करेगा या फिर पूर्व की भांति उक्त मामले में सेटिंग-गेटिंग फार्मूला अपनाकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास करेगा।

लेखक के बारे में

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पिछले एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय विजय पाल खबरों की तेज़ समझ और ज़मीनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। रिपोर्टिंग और समाचार लेखन के क्षेत्र में उन्होंने निरंतर काम किया है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं।

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