परमार्थ निकेतन पहुंची सीएम रेखा गुप्ता, स्वामी चिदानंद से मिलकर यमुना मुद्दे पर की चर्चा
यमुना के पुनर्जागरण को लेकर हुई दूरदर्शी एवं ऐतिहासिक चर्चा
नई दिल्ली। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी की दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से आत्मीय एवं सार्थक भेंट हुई। इस अवसर पर यमुना जी के संरक्षण, पुनर्जीवन और सांस्कृतिक पुनर्स्थापना को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया। भारत की संस्कृति में नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि जीवन, चेतना, संस्कृति और सभ्यता की वाहक हैं। इसी सनातन दृष्टि को साकार करने हेतु एक विशेष मीटिंग हुई।
इस अवसर पर भारत सरकार के केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन जी सहित अनेक विशिष्ट विभूतियाँ उपस्थित रहीं। इस अवसर पर यमुना जी को पुनः उनकी दिव्यता, निर्मलता और अविरलता प्रदान करने के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त संवाद हुआ। इस बात पर विशेष बल दिया कि यमुना जी का पुनर्जीवन केवल पर्यावरणीय परियोजना नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का प्रश्न है।
ये खबर भी पढ़े : संविधान हत्या दिवस लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की प्रेरणा देता है: प्रधानमंत्री मोदीस्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि यदि किसी राष्ट्र की नदियाँ स्वस्थ हैं तो उसका समाज भी स्वस्थ, समृद्ध और संस्कारित होता है। यमुना जी केवल दिल्ली से होकर बहने वाली नदी नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक स्मृतियों की जीवनरेखा हैं। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर भारत की महान सभ्यता तक, यमुना जी भारतीय संस्कृति की अनन्त धारा का जीवंत प्रतीक हैं। इसलिए यमुना का संरक्षण किसी एक विभाग या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज का साझा धर्म है।
बैठक में यमुना जी की स्वच्छता, निर्मलता और अविरलता सुनिश्चित करने हेतु जनभागीदारी आधारित व्यापक अभियान पर विशेष चर्चा हुई। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि केवल मशीनों से नदी की सफाई सम्भव नहीं; जब तक समाज के मन में नदी के प्रति श्रद्धा का प्रवाह नहीं होगा, तब तक जलधारा भी पूर्णतः निर्मल नहीं हो सकती। उन्होंने *"जन-जागरण से जन-भागीदारी और जन-भागीदारी से जन-आन्दोलन"* का सूत्र प्रस्तुत करते हुए प्रत्येक नागरिक को यमुना संरक्षण का सहभागी बनाने पर बल दिया।
यमुना तटों के हरित सौन्दर्यीकरण को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। पूज्य स्वामी जी ने सुझाव दिया कि यमुना किनारों पर व्यापक पौधारोपण अभियान चलाकर पर्यावरण-अनुकूल वृक्षों का रोपण किया जाए, जिससे नदी तटों की जैव विविधता समृद्ध हो, प्रदूषण कम हो, भूजल संरक्षण को बल मिले तथा दिल्ली को प्राकृतिक हरित कवच प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन नहीं देते, बल्कि वे नदियों के मौन रक्षक भी होते हैं।
इस अवसर पर स्वच्छता के नए मापदण्ड विकसित करने की आवश्यकता पर भी विचार हुआ। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि स्वच्छता केवल कचरा हटाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जल की गुणवत्ता, तटों की जैविक सुरक्षा, नागरिक सहभागिता, पर्यावरणीय शिक्षा तथा सांस्कृतिक संरक्षण—इन सभी आयामों को सम्मिलित करते हुए एक समग्र मॉडल विकसित किया जाना चाहिए, जो सम्पूर्ण देश के लिए प्रेरणा बने।
स्वामी जी ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि यमुना जी दिल्ली के लिए केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि राजधानी के पर्यावरणीय संतुलन, भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता, जलवायु संतुलन तथा करोड़ों नागरिकों के स्वास्थ्य की आधारशिला हैं। यदि यमुना स्वस्थ होगी तो दिल्ली की हवा, जल, मिट्टी और जीवन की गुणवत्ता स्वतः बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि "यमुना का पुनर्जीवन वास्तव में दिल्ली के भविष्य का पुनर्निर्माण है।"
भेंटवार्ता के दौरान यमुना तटों पर दिव्य गंगा आरती की तर्ज पर नियमित *यमुना आरती* प्रारम्भ करने के विषय पर भी विशेष चर्चा हुई। विगत माह मुख्यमंत्री दिल्ली, रेखा गुप्ता जी द्वारा यमुना जी की स्वच्छता का वृहद अभियान और लाखों-लाखों पौधों के रोपण की सराहना करते हुए उनका अभिनन्दन किया।
साथ ही यमुना तटों पर गुरुकुलों एवं भारतीय जीवन-मूल्यों पर आधारित संस्कार केन्द्रों की स्थापना का अभिनव प्रस्ताव भी रखा। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना है तो शिक्षा को नदी के तट तक लाना होगा। ऐसे गुरुकुल पर्यावरण संरक्षण, योग, आयुर्वेद, भारतीय ज्ञान परम्परा, जल संरक्षण और जीवन मूल्यों के जीवंत केन्द्र बन सकते हैं, जहाँ विद्यार्थी पुस्तकों के साथ-साथ प्रकृति से भी सीखेंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यमुना जी का संरक्षण सरकार और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संत समाज के मार्गदर्शन और जनसहयोग से यमुना पुनर्जीवन का अभियान नई ऊर्जा प्राप्त करेगा तथा दिल्ली को स्वच्छ, हरित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
