बिजली कर्मियों पर बढ़ता उत्पीड़न अस्वीकार्य, संघर्ष समिति ने जताई नाराजगी
बिजली कर्मियों का छलका दर्द, कर्मचारियों की कमी से बढ़ रहे हादसे
- उत्पीड़न के बल पर बिजली व्यवस्था चलाना संभव नहीं: समिति की चेतावनी
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि भीषण गर्मी और रिकॉर्ड बिजली मांग के बीच दिन-रात मेहनत कर बिजली व्यवस्था संभाल रहे कर्मचारियों का सहयोग लेने के बजाय उनका लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। इससे बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उत्पीड़न और दमन के बल पर बिजली व्यवस्था को लंबे समय तक बनाए रखना संभव नहीं है। प्रबंधन को यह समझना होगा कि बिजली व्यवस्था कर्मचारियों की मेहनत, अनुभव और समर्पण से चलती है, भय और दंड से नहीं।
ये खबर भी पढ़े : कैबिनेटः वाराणसी में 14,448 करोड़ रुपये की गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरीसंघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। दूसरी ओर कर्मचारियों और संविदा कर्मियों की संख्या में भारी कमी कर दी गई है। फॉल्ट बढ़ने, लगातार ओवरलोडिंग और बिना पर्याप्त संसाधनों के जल्दबाजी में फॉल्ट अटेंड करने के कारण बिजली कर्मी आए दिन हादसों और मौत का शिकार हो रहे हैं।
संघर्ष समिति के अनुसार राजधानी लखनऊ में ही लगभग 40 प्रतिशत संविदा कर्मियों की कमी कर दी गई है। पहले गर्मियों में अतिरिक्त गैंग और संविदा कर्मियों की व्यवस्था की जाती थी, लेकिन इस बार उल्टा कर्मचारियों की संख्या घटा दी गई। ऐसे में सीमित कर्मचारियों से चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने की अपेक्षा करना अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है।
संघर्ष समिति ने कहा कि तथाकथित वर्टिकल री-स्ट्रक्चरिंग के नाम पर 11 केवी और 33 केवी मेंटेनेंस, सप्लाई, बिलिंग और मीटरिंग कार्यों को अलग-अलग कर दिया गया है। इससे व्यवस्था पूरी तरह बिखर गई है। आम उपभोक्ता को यह तक समझ में नहीं आ रहा कि समस्या होने पर किस विभाग से संपर्क किया जाए। परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं का गुस्सा सीधे फील्ड कर्मचारियों पर उतर रहा है। कई स्थानों पर बिजली घरों का घेराव, कर्मचारियों के साथ अभद्रता और मारपीट की घटनाएं बढ़ रही हैं।
संघर्ष समिति ने वर्तमान अव्यवस्था के लिए सीधे-सीधे पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। संघर्ष समिति ने कहा कि आम जनता और जनप्रतिनिधियों को यह जानकारी नहीं दी जा रही है कि भीषण गर्मी के दौरान कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय उसे भारी मात्रा में कम कर दिया गया है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि इस कठिन समय में बिजली कर्मचारियों का सहयोग करें। सीमित संसाधनों और अत्यधिक दबाव के बीच बिजली कर्मी लगातार सेवा दे रहे हैं।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के सांसदों और विधायकों से भी अपील की है कि वे सरकार तक बिजली कर्मचारियों की वास्तविक समस्याएं पहुंचाएं। मार्च 2023 के आंदोलन के बाद उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां वापस लेने के आश्वासन के बावजूद अब तक कार्रवाई वापस नहीं ली गई है, बल्कि नई-नई दमनात्मक कार्रवाइयां की जा रही हैं।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
