कैबिनेटः वाराणसी में 14,448 करोड़ रुपये की गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना को मंजूरी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत से 46.039 किलोमीटर लंबे छह लेन के ग्रीनफील्ड गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दे दी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इस परियोजना पर मुहर लगाई गई। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (एनएच-19) को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने वाली यह परियोजना शहर में यातायात जाम कम करने, गंगा तट के साथ बेहतर संपर्क स्थापित करने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत विकसित की जाएगी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि वाराणसी में हर वर्ष 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। काशी में बढ़ते आवागमन और यातायात दबाव को देखते हुए सरकार ने शहर के परिवहन ढांचे को नई ऊंचाई देने के लिए इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी है।
उन्होंने कहा कि परियोजना में छह लेन का एलिवेटेड मुख्य मार्ग, 910 मीटर लंबा शानदार केबल-स्टेयड ब्रिज, 1.32 किलोमीटर लंबा एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवरब्रिज-सह-प्रमुख पुल, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा। परियोजना की कुल लागत में 6,037.85 करोड़ रुपये निर्माण कार्य तथा 541.11 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण पर खर्च किए जाएंगे।
यह कॉरिडोर एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराएगा तथा शहर के सड़क नेटवर्क पर यातायात का दबाव काफी कम करेगा। 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति वाले इस मार्ग के बनने से परियोजना क्षेत्र में औसत यात्रा समय 60 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा। वहीं, एनएच-19 से काशी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने का समय 50 मिनट से घटकर लगभग 25 मिनट हो जाएगा।
यह परियोजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप वाराणसी के बहु-माध्यमीय परिवहन नेटवर्क को मजबूत करेगी। इससे एनएच-19, वाराणसी रिंग रोड, लालबहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, काशी रेलवे स्टेशन, बनारस रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और रामनगर अंतर्देशीय जलमार्ग (आईडब्ल्यूएआई) पोर्ट के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा।
इसके साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), नमो घाट, रामनगर किला और वाराणसी के घाटों तक पहुंच अधिक सुगम होगी। बीएचयू-लंका और सामने घाट के बीच प्रस्तावित एलिवेटेड स्पर लंका चौराहे पर भारी यातायात का दबाव कम करने में मदद करेगा। इससे एनएच-19, बीएचयू-रामनगर कॉरिडोर और एनएच-35 पर भी यातायात का दबाव कम होगा।
परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में गंगा नदी पर 910 मीटर लंबा केबल-स्टे पुल, 1.32 किलोमीटर लंबा एक्स्ट्राडोज्ड फुटओवर ब्रिज, जिसमें ट्रैवलेटर की सुविधा होगी ताकि श्रद्धालु आसानी से काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंच सकें, मौजूदा और प्रस्तावित मालवीय पुल के ऊपर रेल ओवर ब्रिज, आपातकालीन पार्किंग बे, ध्वनि अवरोधक (नॉइज बैरियर), आकर्षक प्रकाश व्यवस्था तथा वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित वास्तुशिल्पीय डिजाइन शामिल हैं।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
