सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अडानी को लाइसेंस देना दोहरा मापदंड: समिति
एक ही स्थिति में रेलवे पर क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और अतिरिक्त सरचार्ज
- निजी डेटा सेंटर को छूट देने की कोशिश पर रोक की मांग
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने नोएडा के सेक्टर-62 स्थित डेटा सेंटर पार्क के लिए अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस स्टेप-इलेवन लिमिटेड को पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस देने की प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है। संघर्ष समिति ने कहा है कि यह मामला केवल एक निजी कंपनी को बिजली आपूर्ति की सुविधा देने का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सार्वजनिक वितरण व्यवस्था, उपभोक्ताओं के हित और क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के समक्ष इस लाइसेंस से संबंधित याचिका संख्या 2333/2025 भी दर्ज है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 08 मई 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने Indian Railways बनाम West Bengal State Electricity Distribution Company Limited मामले में स्पष्ट किया कि रेलवे अपने आंतरिक नेटवर्क में स्वयं के उपयोग के लिए बिजली का उपभोग करता है और वह ‘Deemed Distribution Licensee’ नहीं है। रेलवे को उपभोक्ता मानते हुए Cross-Subsidy Surcharge तथा Additional Surcharge की देनदारी से मुक्त नहीं किया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वितरण लाइसेंस का मूल उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति करना है तथा केवल स्वयं के उपयोग के लिए बंद और स्व-निहित विद्युत नेटवर्क चलाना अपने आप में वितरण लाइसेंसधारी होने के लिए पर्याप्त नहीं है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि कोई बड़ा उपभोक्ता बिजली अपने ही उपयोग के लिए खरीदता है और बाहरी उपभोक्ताओं को बिजली की बिक्री नहीं करता, तो केवल उसके विशाल बिजली भार या अपने परिसर में आंतरिक विद्युत नेटवर्क होने के आधार पर उसे वितरण लाइसेंसधारी का दर्जा देना गंभीर सवाल खड़ा करता है।
रेलवे के मामले में — उपभोक्ता, सरचार्ज देय। डेटा सेंटर के मामले में — लाइसेंसधारी, सरचार्ज से बचने का रास्ता। यह दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जा सकता।
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि रेलवे जैसी सरकारी संस्था को अपने स्वयं के उपयोग के लिए बिजली लेने पर Cross-Subsidy Surcharge और Additional Surcharge देना पड़ता है, तो निजी कंपनियों को केवल अपने डेटा सेंटर के लिए बिजली खरीदने के आधार पर Deemed Distribution Licensee का दर्जा देकर वही आर्थिक दायित्व समाप्त करने की कोशिश क्यों की जा रही है?
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि नोएडा जैसे अत्यधिक लाभदायक औद्योगिक/वाणिज्यिक क्षेत्र में बड़े डेटा सेंटर को अलग पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस देने से सार्वजनिक DISCOM के सबसे बड़े और बेहतर भुगतान करने वाले उपभोक्ता अलग हो सकते हैं। इससे सार्वजनिक वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और अंततः इसका बोझ आम घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों तथा छोटे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
यह केवल नोएडा का मामला नहीं है। यदि इस प्रकार के पैरेलल लाइसेंस को एक मिसाल बना दिया गया तो भविष्य में बड़े औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ता भी सार्वजनिक DISCOM से अलग होकर अपनी सुविधानुसार बिजली खरीदने की व्यवस्था की मांग कर सकते हैं। इससे Cross-Subsidy व्यवस्था कमजोर होगी, सार्वजनिक DISCOM की आय घटेगी और Universal Supply Obligation पर गंभीर असर पड़ेगा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने उत्तर प्रदेश सरकार तथा उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि— नोएडा के डेटा सेंटर के लिए अडानी समूह को पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस देने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए। सर्वोच्च न्यायालय के 8 मई 2026 के निर्णय के आलोक में इस पूरे मामले की कानूनी समीक्षा की जाए।
निजी डेटा सेंटर को ऐसा कोई विशेष दर्जा न दिया जाए जिससे वह Cross-Subsidy Surcharge, Additional Surcharge अथवा सार्वजनिक DISCOM के अन्य वैधानिक राजस्व दायित्वों से बच सके।सार्वजनिक वितरण व्यवस्था को कमजोर करने वाली किसी भी बैकडोर प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया को तत्काल बंद किया जाए। सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसानों, गरीब एवं घरेलू उपभोक्ताओं के हित में Cross-Subsidy व्यवस्था और सार्वजनिक DISCOM की वित्तीय मजबूती से कोई समझौता न हो।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण अथवा पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस के माध्यम से सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विद्युत कर्मचारी, अभियंता, किसान और उपभोक्ता मिलकर पुरजोर विरोध करेंगे।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
