केजीएमयू: मरीज की दो बड़ी आंतों व दो मलद्वार का किया उपचार
— बड़ी आंत को सावधानी से सामान्य आंत से किया अलग
— कई जगहों पर इलाज कराने के बाद भी नहीं मिला आराम,केजीएमयू में हुआ उपचार
लखनऊ। केजीएमयू के डॉक्टरों ने बच्ची की दो बड़ी आंतों और दो मलद्वार का उपचार कर नया जीवनदान दिया। एक अतिरिक्त छेद से मल निकलने से हो रही थी कई समस्याएं , अब पहले से बेहतर ।
अंबेडकर नगर के अकबरपुर पोस्ट के शाहजहांपुर गांव की रहने वाली आठ साल की बच्ची दिव्या को उसके पिता ओम नारायण, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय,केजीएमयू में पीडियाट्रिक सर्जरी ओपीडी में लाए थे। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची को यह समस्या थी कि सामान्य मलद्वार के अलावा बच्चेदानी के रास्ते के नीचे एक अतिरिक्त छेद से मल निकल रहा था। यह समस्या उसके जन्म से ही थी। माता-पिता ने कई जगहों पर इलाज कराया था, लेकिन कोई आराम नहीं मिला। आखिर में उन्हें केजीएमयू रेफर किया गया। प्रोफेसर आनंद पांडे ने मरीज की जांच की और 'कोलोनिक डुप्लीकेशन' (बड़ी आंत का दोहरा होना) की पहचान की। सीटी स्कैन में दो बड़ी आंतें (कोलन) दिखाई दीं, जिसमें लगभग पूरी बड़ी आंत शामिल थी। इसके अलावा बड़ी आंत का रास्ता बच्चेदानी के रास्ते के नीचे खुल रहा था, और दूसरी बड़ी आंत सामान्य जगह पर खुल रही थी। चिकित्सा विज्ञानं की भाषा में इसे लगभग पूर्ण कोलोनिक दोहराव माना गया। डिपार्टमेंट के हेड, प्रोफेसर जिलेदार रावत ने परेशान माता-पिता को सर्जरी की ज़रूरत के बारे में समझाया। डिपार्टमेंट ने गरीब माता-पिता की सर्जरी का खर्च उठाने के लिए मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री फंड का इस्तेमाल करने में मदद की।
ऑपरेशन की टीम
प्रोफेसर जिलेदार रावत की देखरेख में प्रोफेसर आनंद पांडे, डॉ. राहुल राय, डॉ. कृति और डॉ. शोभा ने मरीज का ऑपरेशन किया। एनेस्थीसिया टीम की अगुवाई प्रोफेसर सतीश वर्मा ने की।
प्रोफेसर जिलेदार रावत ने बताया अतिरिक्त वाली बड़ी आंत को सावधानी से सामान्य आंत से अलग किया गया और दोनों को जोड़कर एक ही रास्ता बनाया गया। इस मुश्किल सर्जरी को पूरा करने में तीन घंटे लगे। प्रोफेसर पांडे ने बताया कि यह स्थिति बहुत दुर्लभ है और ऐसे मरीज़ों में से लगभग 50,000 में से 1 में ही ऐसा होता है। मरीज अब स्वस्थ है और अतिरिक्त छेद से मल नहीं आ रहा है। माता-पिता बहुत खुश और राहत महसूस कर रहे हैं और घर लौटने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रोफेसर रावत ने बताया कि पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ऐसे मुश्किल मामलों को संभालने के लिए सक्षम है। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बनी सरकारी योजनाओं का उचित प्रकार से प्रयोग करता है। कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने विभाग को सफल सर्जरी के लिए बधाई दी।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
