नौ वर्षों में 57 आत्मदाह के प्रयास, सुशासन पर उठे गंभीर सवाल

न्याय की उम्मीद टूटने पर राजधानी में बार-बार दोहराया गया खौफनाक विरोध

Published By Harshit
On
Harshit Picture
By Harshit

सत्य प्रकाश भारती

  • नौ वर्षों में अलग-अलग जिलों से आए फरियादियों ने उठाया आत्मघाती कदम, 4 ने  गंवाई जान
  • विधानभवन, लोक भवन और मुख्यमंत्री आवास बनते रहे न्याय की अंतिम चौखट जनता दरबार,
  • समाधान दिवस और तहसील दिवस के बावजूद नहीं थमा सिलसिला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार अपने नौ वर्षों के कार्यकाल में सुशासन, त्वरित न्याय और जवाबदेह प्रशासन को प्रमुख उपलब्धि के रूप में पेश करती रही है। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, सांसद और विधायक तक नियमित जनता दरबार लगाते हैं, जबकि तहसीलों में प्रत्येक सप्ताह समाधान दिवस और तहसील दिवस के माध्यम से लोगों की शिकायतों के निस्तारण का दावा किया जाता है। इसके बावजूद राजधानी लखनऊ में विधानसभा, लोकभवन और मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह और आत्मदाह के प्रयासों की लगातार सामने आती घटनाएं इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही हैं।

प्रदेश सरकार द्वारा विधानसभा में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से दिसंबर 2022 के बीच 35 लोगों ने आत्मदाह अथवा आत्मदाह का प्रयास किया, जिनमें चार लोगों की मौत हुई। इसके बाद वर्ष 2023 से जून 2026 तक सामने आए मामलों में 22 और लोगों ने राजधानी में आत्मदाह का प्रयास किया। इस प्रकार बीते नौ वर्षों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर 57 तक पहुंच गई है।

 विधायक राम मूर्ति वर्मा के नेतृत्व में विशाल धरना प्रदर्शन कर उप जिलाधिकारी टांडा को ज्ञापन सौंपा ये खबर भी पढ़े :  विधायक राम मूर्ति वर्मा के नेतृत्व में विशाल धरना प्रदर्शन कर उप जिलाधिकारी टांडा को ज्ञापन सौंपा

अधिकांश मामलों में पीड़ितों ने पुलिस की निष्क्रियता, भूमि विवाद, पारिवारिक उत्पीड़न अथवा शिकायतों पर कार्रवाई न होने का आरोप लगाया और न्याय की अंतिम उम्मीद लेकर राजधानी का रुख किया। सबसे ताजा मामला 15 जून 2026 का है, जब हरदोई के संडीला से आई मां-बेटी ने विधानसभा के सामने पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। उनका आरोप था कि चोरी और मारपीट के मामले में स्थानीय पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी। पुलिस की सतर्कता से दोनों को बचा लिया गया। 

हरिद्वार से लौट रहे परिवार की कार ट्रैक्टर-ट्रॉली में घुसी, तीन की मौत, तीन घायल ये खबर भी पढ़े : हरिद्वार से लौट रहे परिवार की कार ट्रैक्टर-ट्रॉली में घुसी, तीन की मौत, तीन घायल

इसी महीने सिटी बस के चार परिचालकों ने निजीकरण और रूट ट्रांसफर के विरोध में गोल्फ चौराहे पर आत्मदाह का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने समय रहते उन्हें रोक लिया।नवंबर 2025 में जमीन विवाद से परेशान एक ही परिवार के 12 सदस्य विधान भवन के बाहर सामूहिक आत्मदाह के प्रयास के लिए पहुंच गए, जिन्हें पुलिस ने बचा लिया। सितंबर 2025 में नोएडा की एक महिला अभिनेत्री ने दुष्कर्म मामले में कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री आवास के पास खुदकुशी की कोशिश की।

विद्यालय समय परिवर्तन, जनगणना मानदेय भुगतान की मांग को लेकर शिक्षकों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन ये खबर भी पढ़े : विद्यालय समय परिवर्तन, जनगणना मानदेय भुगतान की मांग को लेकर शिक्षकों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

नवंबर 2024 में गाजियाबाद की एक महिला ने भूमि कब्जे के विरोध में विधान भवन के सामने आत्मदाह का प्रयास किया। अगस्त 2024 में उन्नाव की अंजलि जाटव ने मुख्यमंत्री आवास के पास खुद को आग लगा ली और बाद में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। अप्रैल 2023 में उन्नाव के आनंद मिश्रा ने भी मुख्यमंत्री आवास के निकट आत्मदाह किया और उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

इससे पहले वर्ष 2022 में भाजपा प्रदेश मुख्यालय, वर्ष 2021 में लोकभवन तथा वर्ष 2020 में विधानसभा और मुख्यमंत्री आवास के बाहर कई आत्मदाह और आत्मदाह के प्रयास हुए। इनमें भूमि विवाद, पुलिस कार्रवाई में देरी, पारिवारिक उत्पीड़न, दुष्कर्म और प्रशासनिक उदासीनता जैसे आरोप सामने आए। वर्ष 2018 में उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता और उसके परिवार द्वारा मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह का प्रयास राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था।

लगातार सामने आती ये घटनाएं केवल व्यक्तिगत त्रासदियां नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की शिकायत निस्तारण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं। सवाल यह है कि जब जनता दरबार, समाधान दिवस और तहसील दिवस जैसी व्यवस्थाएं पहले से संचालित हैं, तब भी लोग अपनी शिकायतों के समाधान के लिए राजधानी आकर आत्मदाह जैसा कदम उठाने को क्यों मजबूर हो रहे हैं। नौ वर्षों में सामने आए 57 प्रयास यही संकेत देते हैं कि व्यवस्था और आम नागरिक के बीच भरोसे की खाई अब भी पूरी तरह नहीं भर सकी है।

लेखक के बारे में

Harshit Picture

हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

नवीनतम

लेखा विंग में चूहों का बिल, बदबू से तिलमिलाये, ढ़ढने निकली सेना!

एक सरकारी विभागीय मुख्यालय के लेखा विंग में चूहों के आतंक से सब परेशान
उत्तर प्रदेश 
लेखा विंग में चूहों का बिल, बदबू से तिलमिलाये, ढ़ढने निकली सेना!

लॉन्च हुआ टीबी मुक्त भारत ऐप

लखनऊ। टीबी मरीजों तक सहायता और जानकारी आसानी से पहुंचाने के लिए टीबी मुक्त भारत ऐप लॉन्च किया गया है।...
उत्तर प्रदेश 
लॉन्च हुआ टीबी मुक्त भारत ऐप

संघर्ष समिति ने कहा उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कर संवाद शुरू करें

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन पर संवादहीनता तथा उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां...
उत्तर प्रदेश 
संघर्ष समिति ने कहा उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कर संवाद शुरू करें

उत्तर प्रदेश

लेखा विंग में चूहों का बिल, बदबू से तिलमिलाये, ढ़ढने निकली सेना!

एक सरकारी विभागीय मुख्यालय के लेखा विंग में चूहों के आतंक से सब परेशान
उत्तर प्रदेश 
लेखा विंग में चूहों का बिल, बदबू से तिलमिलाये, ढ़ढने निकली सेना!

लॉन्च हुआ टीबी मुक्त भारत ऐप

लखनऊ। टीबी मरीजों तक सहायता और जानकारी आसानी से पहुंचाने के लिए टीबी मुक्त भारत ऐप लॉन्च किया गया है।...
उत्तर प्रदेश 
लॉन्च हुआ टीबी मुक्त भारत ऐप